*【POST 89】मुरीद होना कितना ज़रूरी?*

_आजकल जो बैअत राइज है उसे बैअते तबर्रुक कहते हैं। जो न फर्ज है न वाजिब और न ऐसा कोई हुक्मे शरई कि जिसको न करने पर गुनाह या आख़िरत में मुदाख़िज़ा हो।_

*_हाँ अगर कोई सही पीर मिल जाए तो उसके हाथ में हाथ। देकर उसका मुरीद होना यकीनन एक अच्छा काम और बाइसे खैर व बरकत है और इसमें बेशुमार दीनी व दुनियावी फ़ाइदे हैं।_*

_लेकिन इसके बावुजूद अगर कोई शख्स अकाइद दुरुस्त रखता हो, बुजुर्गाने दीन और उलामए किराम से महब्बत रखता हो और किसी खास पीर का मुरीद न हो तो उसके लिए यह अकाइद ईमान की दुरुस्तगी, औलियाए किराम व उलमाए ज़विल एहतिराम से मुहब्बत ही काफी है। और किसी खास पीर का मुरीद न होकर हरगिज वह कोई शरई मुजरिम या गुनाहगार नहीं है। मगर आजकल गाँव, देहातों में कुछ जाहिल वे शर पीर यह प्रोपेगंडा करते हैं कि जो मुरीद न होगा उसे जन्नत नहीं मिलेगी। यहाँ तक कि कुछ नाख्वान्दा पेशेवर मुकर्रिर जिनको तकरीर करने की फुरसत है मगर किताबें देखने का वक्त उनके पास नहीं। जलसों में उन जाहिल पीरों को खुश करने के लिए यह तक कह देते हैं_

*_कि जिसका कोई पीर नहीं उसका पीर शैतान है और कुछ नाख्वान्दे इसको हुजूर ﷺ का फरमान बताते हैं। और इससे आज की पीरी मुरीदी मुराद लेते हैं। अव्वलन तो यह कोई हदीस नहीं। हाँ कुछ बुजुगों से जरूरी मनकूल है कि जिसका कोई शैख नहीं उसका शैख शैतान है। तो उस शैख से मुराद मुरशिदे आम है न कि मुरशिदे ख़ास। और मुरशिदे आम कलामुल्लाह व कलामे अइम्मा शरीअत व तरीकत व कलामे उलमाए ज़ाहिर व बातिन है। इस सिलसिलए सहीहा पर कि अवाम का हादी कलामे उलमा और उलमा का रहनुमा अइम्मा और अइम्मा का मुरशिद कलाम रसूल और रसूल का पेशवा कलामुल्लाह_*

*सय्यिदी व सनदी आलाहजरत अलैहिर्रहमतु वर्रिदवान फ़रमाते*

_सुन्नी सहीहुल अकीदा कि अइम्मए हुदा को मानता, तकलीदे अइम्मा को ज़रूरी जानता, औलियाए किराम का सच्चा मुअतकिद, तमाम अकाइद में राहें हक पर मुस्तकीम वह हरगिज वे पीर नहीं, वह चारों मुरशिदाने पाक यानी *कलामे खुदा और रसूल ﷺ* व अइम्मा व उलमाए जाहिर व बातिन उसके पीर हैं अगरचे व-जाहिर किसी ख़ास बन्दए खुदा के दस्ते मुबारक पर शरफ़े बैअत से मुशर्रफ़ न हुआ हो।_

📗 *(निकाउस्सलाफ़ह फिल अहकामिल बैअते वल ख़िलाफ़ह सफ़हा 40)*

*_और फरमाते हैं।_*
_रस्तगारी (जहन्नम से नजात और छुटकारे) के लिए नबी को मुरशिद जानना काफ़ी है।_

📙 *(फतावा अफ्रीका, सफहा 136)*

_इस सिलसिले में मजीद तहकीक व तफ़सील के लिए *आलाहजरत अलैहिर्रहमह* की तसनीफ़ात में *फ़तावा अफ्रीका,* बैअत क्या है और *निकाउस्सलाफ़ह* वगैरा किताबों का मुतालआ । करना चाहिए_

*_खुलासा यह कि अगर जाअ शराइत मुत्तबेअ श पीर मिले मुरीद हो जाए कि बाइसे दंर व बरकत और दरजात की बलदी का सबब है। और ऐसा लाइक व अहल पीर न मिले तो ख्याही न ख्वाही गाँव गाँव फेरी करने वाले जाहिल वे शर, उलमा की बुराई करने वाले नाम निहाद पीरों के हाथ में हाथ हरगिज न दे। ऐसे लोगों से मुरीद होना ईमान की मौत है।_*

📚 *गलत फ़हमियाँ और उनकी इस्लाह सफहा,88,89*

📍 *Note- आप तमामी हजरात को जुमआ तुल करीम बहुँत बहुँत मुबारक हो आप सभी जिम्मेदार हजरात से मेरी छोटी सी इल्तिजा है। अपनी मस्जिदों मे अपनें इमामो से अपनी माँ बहनों की हिफाज़त और नसीहत के लिए ब्यान करवाए और गैर मुस्लिम के मन्सूबो को नाकाम होनी की पूरी कोशिश करे। अल्लाह तआला जब तक उस कौम की मदद नही करता जब तक बह कौम हक के लिए आवाज़ न उठाएँ दुआ है। अल्लाह तआला से हमारी माँ बहनों की हिफाज़त फरमाए और उन्हे अक्ले सलीम अता फरमाऐ।*

*इस गुनहगार को अपनी ख़ास दुआ मे याद रखना*

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