*_﷽-الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ الله ﷺ_* *______________________________________* *{इस्लामी हैरत अंगेज़ मालूमात पोस्ट(11)}* ◆_____________________________________◆ *हज़रते उमर फारूक आज़म का बयान पोस्ट(1)* ◆_____________________________________◆


सवाल- हज़रत उमर फारूके आज़म रज़ियल्लाहु तआला अन्हु की विलायत किस सन् में हुई?
*जवाब- हज़रत उमर फारूके आज़म रज़ियल्लाहु तआला अन्हु की विलायत आमूल फ़ील के तेरह साल बाद मुहर्रम की चांद रात को हुई।*
(मदारिजुन्नबुव्वत ज़िल्द2सफ़्हा915)

सवाल- हज़रत उमर फारूके आज़म रज़ियल्लाहु तआला अन्हु का लक़ब"फ़ारूक़"क्यों हुआ?
*जवाब- आपका लक़ब फ़ारूक़ होने का वाकिया यूँ है कि एक यहूदी और एक मुनाफ़िक़ के दरमियान जमीन की सैराबी पर झगड़ा हुआ और मामला बारगाहे रिसालत में पेश हुआ नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने वाकिया को सुनने के बाद यहूदी के हक़ में फैसला दिया मुनाफ़िक़ ने वह फैसला न माना और यहूदी से कहा हज़रत उमर (फारूके आज़म रज़ियल्लाहु तआला अन्हु)के पास दौबारा फैसला कराए दोनों ने हज़रत उमर फारूके आज़म रज़ियल्लाहु तआला अन्हु के पास आकर मामला रखा यहूदी ने अव्वल फैसले की भी खबर दी की हुज़ूर(सल्लाल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम)ने यह फैसला सादिक़ फ़रमाया है लेकिन इसने ये फैसला न माना और मुझे आपके पास ले आया हज़रत उमर फारूके आज़म रज़ियल्लाहु तआला अन्हु ने यह सुनकर फ़रमाया कि अब में ऐसा फैसला करूँगा की इसको इन्कार करने का मौका ही नही मिलेगा यह कहकर आप घर में गए और तलवार लाकर उस मुनाफ़िक़ का सर कलम कर दिया फ़रमाया जो अल्लाह के रसूल(सल्लाल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम)का फैसला न माने उसका मेरे यहाँ यही अंजाम है नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने जब इस वाकिए को सुना तो हज़रत उमर फारूके आज़म रज़ियल्लाहु तआला अन्हु को"फ़ारूक़"के लक़ब से नवाजा की उनके इस अमल से हक़ व बातिल में फ़र्क़ हो गया।*
(खाज़िन सफ़्हा397)
*एक कौल यह भी है कि इसके बाद हज़रत जिब्राईल अलैहिस्सलाम हाज़िर खिदमत रिसालत हुए और आपका लक़ब फ़ारूक़ रखा दूसरा कौल यह है कि हज़रत उमर फारूके आज़म रज़ियल्लाहु तआला अन्हु जिस दिन मुशर्रफ इस्लाम हुए उसी दिन मस्जिद हराम में अल्ल ऐलान की गई तब नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने आपको इस लक़ब से नवाजा।*
(हाशिया14जलालैन300)

सवाल- हज़रत उमर फारूके आज़म रज़ियल्लाहु तआला अन्हु ने किस सन् में इस्लाम कुबूल किया और उस वक़्त आपकी उम्र कितनी थी?
*जवाब- आप सन्6नब्वी को सत्ताईस साल की उम्र में इस्लाम से मुशर्रफ हुए और बाज़ ने 5नब्वी कहा है।*
(तारीखुल खुल्फा सफ़्हा109/अस्मार्रिजाल मिश्कात सफ़्हा602)

सवाल- हज़रत उमर फारूके आज़म रज़ियल्लाहु तआला अन्हु के इस्लाम लाने के वक़्त तक कितने लोग मुस्लमान हो चुके थे?
*जवाब- जब आप इस्लाम के दायरे में दाखिल हुए तो उस वक़्त तक तैसीस मर्द और छह औरतें इस्लाम कुबूल कर चुकी थी दूसरा कौल यह है कि चालीस मर्द और तेईस औरतें इस्लाम ला चुकी थी तीसरा कौल यह है कि उन्तालीस मर्दों और तेईस औरतों के बाद इस्लाम कुबूल किया चौथा कौल यह है कि पैतालीस मर्द और ग्यारह औरतों के बाद आप इस्लाम से मुशर्रफ हुए पाँचवा कौल यह है कि आप से पहले चालीस मर्द और ग्यारह औरतें इस्लाम से मुशर्रफ हो चुकी थीं।*
(ख़ज़ाइनुल इरफ़ान ज़िल्द10सफ़्हा4/अस्मार्रिजाल मिश्कात सफ़्हा602)
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*हदीसे पाक में है कि इल्म फैलाने वाले के बराबर कोई आदमी सदक़ा नहीं कर सकता।*
(क़ुर्बे मुस्तफा,सफह 100)

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