सवाल- हज़रते उमर फारूके आज़म रज़ियल्लाहु तआला अन्हु ने कितनी शादियाँ कीं?
*जवाब- आपका पहला निक़ाह जमाना जाहिलियत में जैनब बिन्ते मज़ऊन से हुआ था जिनके बतन से अब्दुल्लाह, अब्दुर्रहमान और हज़रत हफ़सा रज़ियल्लाहु अन्हुम पैदा हुई हज़रत जैनब रज़ियल्लाहु तआला अन्हा मक़्क़ा में ही ईमान लायी और वही आपका इंतिक़ाल हुआ दूसरा निक़ाह जमाना-ए-जाहिलियत के जमाने में ही मलिका बिन्ते जरुल से किया जिससे अब्दुल्लाह पैदा हुए क्योंकि यह बीवी ईमान न लायी इसलिये सन्6हिज़री में उसको तलाक़ दे दी तीसरा बीवी करीबा बिन्ते उमैया मख्ज़ुमी थी जिससे जमाना-ए-जाहिलियत में ही निक़ाह किया और सन्6हिज़री के बाद सुलह हुदैबिया में इस्लाम न लाने की वजह से तलाक़ दे दी चौथा निक़ाह इस्लाम के ज़माने में उम्मे हकीम बिन्ते हारिस बिन हिशाम मख्ज़ुमी से किया जिसके बतन से फातिमा पैदा हुई पाँचवा निक़ाह मदीना मुनव्वरा आकर सन्7हिज़री में जमीला बिन्ते आसिम बिन साबित से किया जिनके बतन से आसिम पैदा हुए लेकिन उसको भी किसी भी किसी वजह से तलाक़ दे दी छठा निक़ाह सन्7हिज़री में उम्मे कुलसुम बिन्ते अली रज़ियल्लाहु तआला अन्हुम से किया उसके बतन से रुकैया और जैद पैदा हुए और् आतिका बिन्ते जैद बिन उमरू जो आपकी चचाज़ाद बहन थी और फकीहा यमीना भी हज़रत उमर रज़ियल्लाहु तआला अन्हु की बीवियों में शुमार की जाती हैं फकीहा के बारे में बाज़ ने लिखा है कि वह लोड़ी थीं उसके बतन से अब्दुर्रहमान और अवसर पैदा हुए।*
(तारिख-ए-इस्लाम ज़िल्द1सफ़्हा366)
सवाल- हज़रते उमर फारूके आज़म रज़ियल्लाहु तआला अन्हु के कातिल का नाम क्या है और आपकी शहादत का वाकिया क्या है?
*जवाब- आपकी शहादत का वाकिया इस तरह है कि मदीना तैय्यबा में मुगेरा बिन शोबा रज़ियल्लाहु तआला अन्हु का एक नसरानी गुलाम रहता था जिसका नाम फ़ैरूज़ था और कुन्नियत अबु लूलू उसने एक दिन बाजार में आपसे शिकायत की कि मेरा आक़ा मुगेरा मुझसे ज्यादा महसूस लेता है आप कम करा दीजिये हज़रते उमर फारूके आज़म रज़ियल्लाहु तआला अन्हु ने उससे पूछा किस कद्र महसूस वह वसूल करता है अबु लूलू ने कहा दो दिरहम रोज़ाना आपने दरयाफ़्त फ़रमाया तू क्या काम करता है उसने कहा लौहार लक्काशी और बढ़ई गिरी आपने फ़रमाया की इन कामों के मुकाबले में यह रक़म ज्यादा नही है यह सुनकर अबु लूलू अपने दिल में सख्त नाराज़ हुआ फिर हज़रते उमर फारूके आज़म रज़ियल्लाहु तआला अन्हु ने उससे मुखातिब होकर फ़रमाया की मैने सुना है कि तू ऐसी चक्की बनाना जानता है जो हवा के जरिए चलती है तू मुझको भी ऐसी चक्की बना दे उसने जवाब में कहा बहुत खूब मै ऐसी चक्की बना दूँगा जिसकी आवाज़ अहले मुशरिक व मगरिब सुनेंगें दूसरे दिन नमाज़े फ़ज़्र के लिए लोग मस्जिद में जमा हुए अबु लूलू एक खंज़र लिए हुए मस्ज़िद में दाखिल हो गया जब नमाज़ के लिए सफें सही हो गही और हज़रते उमर फारूके आज़म रज़ियल्लाहु तआला अन्हु इमामत के लिए आगे बढ़कर नमाज़ शुरू कर चुके तो अबु लूलू ने निकलकर हज़रत उमर रज़ियल्लाहु अन्हु पर खंज़र के छह वार किए जिनमे एक वार नाफ़ के नीचे पड़ा अबु लूलू मस्जिदे नब्बी से भागा लोगों ने उसे पकड़ने की कोशिश की उसने कई शख्सों को जख्मी किया और कलीब इब्ने अबी बकीर रज़ियल्लाहु तआला अन्हु को शहीद कर दिया आखिर वह गिरफ्तार कर लिया गया लेकिन उसने गिरफ्तार होते ही खुदकशी कर ली और जब आपको खंज़र का ज़ख्म लगा तो आपकी जबान मुबारक़ पर यह जुमला था"व कान अमरुल्लाहि कदरन मकदूर"।*
(तारीख इस्लाम सफ़्हा364/अवराके गम सफ़्हा196)
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*हदीसे पाक में है कि इल्म फैलाने वाले के बराबर कोई आदमी सदक़ा नहीं कर सकता।*
(क़ुर्बे मुस्तफा,सफह 100)
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