*_शबे बरात वगैरा के मौके पर कब्रिस्तानों में चिराग बत्तियां की जाती हैं। इस बारे में यह जान लेना जरूरी है कि बिल्कुल ख़ास कब्र के ऊपर चिराग व मोमबत्ती जलाना लोबान व अगरबत्ती सुलगाना मना है। कब्र से अलाहिदा किसी जगह एसा करना जाइज़ है जबकि इन चीजों से वहाँ आने जाने और कुर्आन शरीफ़ और फातिहा वगैरा पढ़ने वालों को या राहगीरों को नफ़ा पहुँचने की उम्मीद हो। यह ख्याल करना कि इस की रोशनी और खुशबू कब्र में जो दफ़न हैं उनको पहुंचेगी जहालत नादानी, नावाकिफ़ी और गलतफहमी है। दुनिया की रोशनि यां सजावटें और डेकोरेशन वरा जो कब्रिस्तानों में करते हैं और यह खुशबूएं मुर्दो को नहीं पहुँचती, मुर्दों को सिर्फ सवाब ही पहुँचता है। मुर्दा अगर जन्नती है तो उसके लिए जन्नत की खुशबू और रौशनी काफी है। और जहन्नमी के लिए कोई रोशनी है न ख़ुशबू_*
📗 *(सही मुस्लिम जिल्द 1, सफ़हा 76, फतावा रजविया, जिल्द 4, सफ़हा 141)*
📚 *गलत फ़हमियाँ और उनकी इस्लाह सफहा, 65*
📗 *(सही मुस्लिम जिल्द 1, सफ़हा 76, फतावा रजविया, जिल्द 4, सफ़हा 141)*
📚 *गलत फ़हमियाँ और उनकी इस्लाह सफहा, 65*
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