_बाज़ लोग कुछ तारीखों में शादी ब्याह और खुशी का काम करने को मना करते हैं और खुद भी नहीं करते हैं मसलन 3, 13, 23, और 8, 18, 28 .. इन तारीखों को शादी व खुशी के लिए बुरा जाना जाता है हालाँकि ये सब बेकार बातें हैं और काफ़िरों और गैर मुस्लिमों की सी वहमपरस्तियाँ हैं। इस्लाम में ऐसा कुछ नहीं हैं।_
*_निकाह व शादी हर दिन और हर तारीख़ में जाइज है। माहे मुहर्रम में निकाह को बुरा जानना राफ़ज़ियों, शीओं का तरीका है जो बाज़ जगह अहले सुन्नत में भी फैल गया है। मुसलमानो! इस्लाम को अपनाओ और सच्चे पक्के मुसलमान बनो, वहमपरस्तियाँ छोड़ो, खुदा व रसूल की पैरवी करो मुहर्रम और सफ़र (चेहल्लम में निकाह को बुरा मत जानो।)_*
📚 *गलत फ़हमियाँ और उनकी इस्लाह सफहा, 106*
*_निकाह व शादी हर दिन और हर तारीख़ में जाइज है। माहे मुहर्रम में निकाह को बुरा जानना राफ़ज़ियों, शीओं का तरीका है जो बाज़ जगह अहले सुन्नत में भी फैल गया है। मुसलमानो! इस्लाम को अपनाओ और सच्चे पक्के मुसलमान बनो, वहमपरस्तियाँ छोड़ो, खुदा व रसूल की पैरवी करो मुहर्रम और सफ़र (चेहल्लम में निकाह को बुरा मत जानो।)_*
📚 *गलत फ़हमियाँ और उनकी इस्लाह सफहा, 106*
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