*【POST 108】क्या नक़द और उधार की अलग अलग कीमत रखना मना है*

*_अगर कोई शख्स अपना माल किसी के हाथ बेचे और यह कहे कि अगर अभी कीमत अदा कर दोगे तो इतने में और उधार खरीदोगे तो इतने पैसे होंगे। मसलन अभी 300 रुपया है और उधर खरीदोगे पैसे बाद में अदा करोगे तो 350 रुपये देना होंगे, तो यह जायज है इसको कुछ लोग नाजायज ख्याल करते हैं और सूद समझते हैं यह उनकी गलतफहमी है यह सूद नहीं है ।_*

_हाँ अगर खरीदारी के वक्त इस बात को खोला नहीं और माल 300 रुपये में  फरोख्त कर दिया और रकम अदा करने में उसने देर की तो उससे पैसे बड़ा कर वसूल किये मसलन 350 रुपये लिये तो यह सूद हो जायेगा। मतलब यह है कि उधार और नकद का भाव अगर अलग अलग हो तो खरीदारी के वक़्त  ही इसकी वजाहत कर दे बाद में उधार की वजह से रकम बड़ा कर लेना  सूद और हराम है। ,_

📚 *(फतावा रज़विया ,जिल्द 17, सफ़हा 97,मतबूआ रज़ा फाउन्डेशन, लाहौर)*
📚 *_(फतावा फैज़ुर्रसूल, जिल्द 2 सफ़हा 380)_*
📚 *गलत फ़हमियाँ और उनकी इस्लाह सफहा,112*

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