*【POST 85】लड़को की शादी में बजाए वलीमे के मंढिया करना*

_लड़के की शादी मे जुफ़ाफ़ यानी बीवी और शौहर के जमा होने के बाद सुबह को अपनी बिसात के मुताबिक़ मुसलमानों को खाना खिलाया जाए उसे वलीमा' कहते हैं और यह *सय्यिदे आलम सल्लल्लाहो तआला अलह वसल्लम* की मुबारक सुन्नत है। काफी हदीसों में इसका जिक्र है। सरकार ने खुद वलीमे किये और सहाबए किराम को भी उस का हुक्म दिया मगर आज कल काफ़ी लोग शादी से पहले दावतें करके खाना खिलाते हैं जिसको मंढिया कहा जाता है।_

_वलीमा न करना उसकी जगह मंढिया करना ख़िलाफ़ सुन्नत है। मगर लोग रस्म व रिवाज पर अड़े हुए हैं और अपनी ज़िद और हटधर्मी या नावाक़िफ़ी की बुनियाद पर *रसूले करीम सल्लल्लाहो तआला अलह वसल्लम* की इस मुबारक और प्यारी सुन्नत को छोड़ देते हैं। इस्लाम के इस तरीके में एक बड़ी हिकमत यह है कि अगर निकाह से पहले ही खाना खिला दिया तो हो सकता है किसी वजह से निकाह न होने पाए और अक्सर ऐसा हो भी जाता है तो इस सूरत में वह निकाह से पहले के तमाम इख़राजात बे मक़सद और बोझ बन कर रह जाते हैं।_

📚 *गलत फ़हमियाँ और उनकी इस्लाह सफहा,83*

*Note :- आप को बता दू मंढिया उसे कहते है। जो लड़को की शादी यानी निकाह होने से पहले आवाम बिरादरी को दावत देकर खाना खिलाया जाता है। यह खिलाफ़े शरअ है। लेकिन बाज़ लोगों ने इसका मामूल बना लिया है। एक और बात अगर लोग़ व़लीमा करते है तो इतना दिखावा इतना ख़र्च करते है। जो शरासर ग़लत और खिलाफ़े शरअ भी है। इस्लाम ने फ्जूल ख़र्च के लिए मना किया है। जिसका हिसाब हमे देना होंगा लेकिन आवाम इसको समझने का नाम नही लेती है। जो हम फ्ज़ूल ख़र्च करते है इसकी बजाह हम यही पैसा किसी ग़रीब लड़की कि शादी निकाह करने मे लगादे जो मुफलिसी के चलते अपने घर मे बैठी है*

*_सोचो मुसलमानो कहा गई तुम्हारी ग़ैरत क्या जरा भी तुम्हे अल्लाह तआला और उसके रसूल सल्लल्लाहो तआला अलह वसल्लम की रज़ा की फ़िक्र नही देती है। ऊपर से अपने आपको गुलामे रसूल कहते हो सिर्फ़ कहने से गुलाम नही हो सकते उसकी रज़ा अगर चाहनी है तो अपने किरदार को बदलना होंगा कसम ख़ुदा की अल्लाह तआला की रज़ा के लिए तुमने अपनी कमाई का एक पैसा भी ख़र्च कर दिया बरोज क़यामत अल्लाह तआला इसका अज्र जरूर देगा यकीन जानो ज़रा सोचो मेरे भाईयों आज यह पैसा हमारी रहती दुनिया तक साथ देगा बाद मरने के हमारे हाँथ खाली रह जाएंगे इसी के लिए शायर कुछ इस तरह कहता।_*

*_सज़ा लो अपने दामन मे दरूदे पाक के जुगनू_*
*_अंधेरी कब्र मे हम सबको उजाले की ज़रूरत है।_*

   *जब हमे अंधेरी कब्र मे रहना ही है तो क्यूँ न नेक काम करके अपनी कब्र को रोशन करें फक़त मेरा कहना इतना है दुनिया भी देखों लेकिन कुछ ऐसा कर जाओ जिससे दुनियाँ मे भी नाम हो आखिरत मे भी इसका अज्र मिले अगर मेरी पोस्ट से किसी एक ने भी नसीहत ली यकीन जानो मेरी बख्शिस का जरिया वह शख्स होंगा इन्शा अल्लाह तआला*

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