_अकाइदे सहीहा पर काइम रहे अहकमे शरीअत पर अमल करे और तमाम औलिया किराम और उलमाए ज़विल एहतिराम से मुहब्बत करे। *हुजूर पुरनूर सय्यिदना गौसे आजम रदियल्लाहु तआला अन्हु* से अर्ज की गई कि अगर कोई शख्स हुजूर का नाम लेवा हो और उसने न हुजूर के दस्ते मुबारक पर बैअत की हो न हुजूर का ख़िरक़ा पहना हो क्या वह हुजूर के मुरीदों में है तो फ़रमाया : ‘‘जो अपने आप को मेरी तरफ़ मनसूब करे और अपना नाम मेरे गुलामों में शामिल करे अल्लाह उसे कबूल फरमाएगा और वह मेरे मुरीदों के जुमरे में है।”_
📖 *(ब हवाला फतावा अफ्रीका, सफ़हा 140)*
_इसके अलावा *सय्यिदना शेख अब्दुल हक मुहद्दिस देहलवी अलैहिर्रहमह* ने फरमाया कि जिसको पीरे कामिल जामेअ शराइत न मिले वह हुजूर पर कसरत से दुरूद शरीफ़ पढ़े।_
📚 *गलत फ़हमियाँ और उनकी इस्लाह सफहा,92,93*
📖 *(ब हवाला फतावा अफ्रीका, सफ़हा 140)*
_इसके अलावा *सय्यिदना शेख अब्दुल हक मुहद्दिस देहलवी अलैहिर्रहमह* ने फरमाया कि जिसको पीरे कामिल जामेअ शराइत न मिले वह हुजूर पर कसरत से दुरूद शरीफ़ पढ़े।_
📚 *गलत फ़हमियाँ और उनकी इस्लाह सफहा,92,93*
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