सवाल- हज़रत आदम अलैहिस्सलाम अपनी ख़ता पर कितने सालों तक रोते रहे?
*जवाब- आप तीन सौ साल तक इस क़द्र अश्कबार रहे कि हजरत जिब्राईल अलैहिस्सलाम को भी आपके रोने पर रोना आता और उन्होंने बारगाहे इलाही में आपकी सिफ़ारिश व शफाअत की और वह भी अक्सर हदीसों से साबित है कि अगर तमाम रूए ज़मीन के रोने वाले जमा किए जाए तो गिरया हज़रत आदम अलैहिस्सलाम बढ़ा हुआ होगा और तफ़सीर अलम नशरह में है आप अपनी जिल्लत पर दो सौ साल रोए और एक रिवायत के मुताबिक आप एक सौ अस्सी साल तक रोते रहे सत्तर साल तो पेड़ खाने पर सत्तर साल अपनी ख़ता पर और चालीस साल कतले हाबील पर और एक रिवायत में तीन सौ सत्तर साल है इन कौलो में पहले कौल तर्बियत दि जाती।*
(तफ़्सीर नईमी जिल्द1सफ़्हा337से339/तफ़सीर अलम नशरह सफ़्हा78/अलबिदाया वन्निसाया जिल्द1सफ़्हा80/मलफूजात ख्वाजा निजामुद्दीन औलिया रहमतुल्लाह सफ़्हा142)
सवाल- हज़रत हव्वा रज़ियल्लाहु-तआला-अन्हा कितनी बार हामला हुई और कितनी औलादों से सरफराज हुई?
*जवाब- इस मुतालिक अकवाल वारिश है जो इस तरह है(1)बाद इत्तिसाल आदम हज़रत हव्वा रज़ियल्लाहु-तआला-अन्हा बीस बार हामला हुई और हमल में एक लड़का एक लड़की विलायत होती यानी कुल चालीस बच्चे(2)हज़रत हव्वा रज़ियल्लाहु-तआला-अन्हा के हर हमल से दो बच्चे होते मगर हज़रत शीस अलैहिस्सलाम रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम के अजदाद में से हैं इस लिए आप तन्हा पैदा हुए यानी कुल उन्तालिस बच्चे बीस साहबज़ादे और उन्नीस साहबज़दियाँ(3)चालीस बार हामला हुई और अस्सी बच्चे पैदा हुए(4)एक सौ बीस बच्चे पैदा हुए।*
(अल अतक़ान जिल्द2सफ़्हा2/तफ़सीर नईमी जिल्द4सफ़्हा416/तफ़्सीर अलम नशरह सफ़्हा78/मआरिजनबुव्वत सफ़्हा61)
सवाल- हज़रत आदम अलैहिस्सलाम के बच्चों के नाम क्या है?
*जवाब- बाज़ के नाम जो मिल सके है वह यह लिखे है"बच्चों के नाम"(1)क़ाबील(2)हाबील(3)आयत(4)शबूआ(5)हिंद(6)सरावीस(7)क़हूर(8)सनक(9)वारक़(10)शीस अलैहिस्सल्लाम(11)अब्दुल मुगीस(12)अब्दुल हारिस(13)वद(14)सवाअ(15)यगूस(16)यऊक(17)नसर(18)अब्दुल्लाह(19)उबैदुल्लाह(20)उबैदुर्रहमान।*
(अल अतक़ान फ़ी उमूमुल कुरआन जिल्द2सफ़्हा190/हाशिया जलालैन सफ़्हा146)
*बच्चीयों के नाम(1)अक़्लीमा(2)अशोर(3)जज़ूरा(4)अजूरा(5)उम्मे मुगीस(6)ल्यूदा।*
(अल अतक़ान जिल्द2सफ़्हा190/ख़जाइनुल इरफान पारा6रूकु9)
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*हदीसे पाक में है कि इल्म फैलाने वाले के बराबर कोई आदमी सदक़ा नहीं कर सकता।*
(क़ुर्बे मुस्तफा,सफ़्हा100)
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