*《याजूज व माजूज का बयान 》*


सवाल- याजूज व माजूज किसकी औलाद में से हैं?
*जवाब- याजूज व माजूज यह याफ़त बिन नूह अलैहिस्सलाम की औलाद से फ़सादी गिरोह है।*
(ख़जाईनुल इरफान 16/2)

सवाल- याजूज व माजूज की तादाद कितनी है और उन्हें कैद क्यों किया गया है?
*जवाब- इनकी तादाद बहुत ज्यादा है ये ज़मीन में फ़साद करते थे रबीअ के जमाने में निकलते थे खेतियाँ और सब़्जे खा जाते थे और सूखी चीज़े लादकर ले जाते थे आदमियों दरिन्दों वहशी जानवरों और सांप बिच्छुओं तक को खा जाते हैं हजरत जुल करनैन से लोगों ने इनकी शिकायत की तो आपने इन सबको मज़बूत चारदीवारी में क़ैद कर दिया।*
(ख़जाईनुल इरफान 16/2)

सवाल- हज़रत जुल्करनैन ने जिस चारदीवारी में याजूज व माजूज को क़ैद किया उसकी तामीर किन चीज़ों से की गई?
*जवाब- आपने दीवार की तामीर के लिए जमीन खुदवाई जब पानी तक पहुँची तो उसमें पत्थर पिघलाए हुए तांबे जमाए और लौहे के तख़्त ऊपर नीचे चिनकर उनके दरमियान में लकड़ी और कोयला भरवा दिया और आग दे दी इस तरह यह दीवार पहाड़ की बुलंदी तक ऊँची कर दी गई और दोनों पहाड़ों के बीच कोई जगह न छोड़ी गई ऊपर से पिघला हुआ तांबा दीवार में फैला दिया गया यह सब मिलकर एक सख्त जिस्म बन गया।*
(ख़जाईनुल इरफान 16/2)

सवाल- उस दीवार की लंबाई चौड़ाई और ऊँचाई कितनी है जिसमें याजूज व माजूज कैद हैं?
*जवाब- इसकी बुलंदी सौ ग़ज चौड़ाई पचास ग़ज और दोनों दीवारों के बीच सौ मील का फासला है।*
(हाशिया जलालैन 14/252)

सवाल- याजूज व माजूज इस आहिनी दीवार से कब और किस तरह निकल आएंगे?
*जवाब- हदीस शरीफ में है कि याजूज व माजूज रोजाना इस दिवार को तोड़ते हैं दिन भर मेहनत करते करते जब इसके तोड़ने के करीब होते हैं तो इनमें कोई कहता है कि वाक़ी कल तोड़ लेंगे दूसरे दिन जब आते है तो वह व हुक्मे खुदा वन्दी पहले से ज्यादा मज़बूत हो जाती है क़यामत के करीब जब उनके निकलने का वक़्त आएगा तो उनमें से एक कहने वाला कहेगा अब चलो बाकी दिवार कल तोड़ लेंगे इंशाअल्लाह "इंशाअल्लाह" कहने का यह समरा होगा कि उस दिन की मेहनत बेकार नहीं जाएगी और अगले दिन दीवार उन्हें उतनी टूटी हुई मिलेगी जितनी पहले रोज़ तोड़ गए थे और फिर वह निकल आयेंगे।*
(ख़जाईनुल इरफान 16/2)

सवाल- याजूज व माजूज क़ैद से निकलने के बाद किन किन शहरों में दाख़िल न हो सकेंगे?
*जवाब- यह मक्का मुकर्रमा मदीना तैय्यबा और बैतुल मुकद्दर में दाख़िल न हो सकेंगे।*
(ख़जाईनुल इरफान 16/2)

सवाल- अल्लाह तआला किसकी दुआ से याजूज व माजूज को हलाक फरमाएंगा?
*जवाब- अल्लाह तआला ईसा अलैहिस्सलाम की वद्दुआ से उन्हे हलाक फरमाएंगा।*
(ख़जाईनुल इरफान 16/2)

सवाल- याजूज व माजूज किस तरह हलाक होंगे?
*जवाब- इस तरह कि उनकी गर्दनों में कीड़े पैदा होंगे जो उनकी हलाकत का सब्ब होंगे।*
(ख़जाईनुल इरफान 16/2)

दिवार का नाम सद्दे सिकन्दरी है जो बहरे कुल्ज़म के मशिरकी साहिली इलाक़ा एशियाए कोचक में वाक़े है ।

(तारीख़े आलम सफ़ा न० 44)

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*हदीसे पाक में है कि इल्म फैलाने वाले के बराबर कोई आदमी सदक़ा नहीं कर सकता।*
(क़ुर्बे मुस्तफा,सफ़्हा100)
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