POST 89

*_✭ﺑِﺴْــــــــــــــــﻢِﷲِﺍﻟﺮَّﺣْﻤَﻦِﺍلرَّﺣِﻴﻢ✭_*

*_★الصــلوة والسلام عليك يارسول الله ﷺ★_*
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           📕 *_करीना -ए-जिन्दगी_*📕

      ✍🏻 *_....भाग-8⃣9⃣_*

                 *_[जरा इसे भी पढ़िए!]_*
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        *_अज़ल (निरोध, Condom) का इस्तेमाल_* *__________________________________________*
     _ज्यादा बच्चे पैदा न हो, उसके लिये मौजुदा दौर मे निरोध, कॉपर टी, माला-डी (खाने की गोलीयॉं) वगैरह इस्तेमाल मे लाई जा रही है! अहदे रिसालत मे सिलसिला पैदाईश को रोकने को या कम करने के लिए कुछ हजरात अपनी बांदियों से अज़ल किया करते थे!_

💫  *_अज़ल क्या है? :-_*
 _अज़ल उसे कहते है की मुबाशरत के वक्त जब मर्द को इंजाल होना करीब हो, तो मर्द अपने आले को औरत की फर्ज से निकाल कर मनी रहम के बाहर खारीज कर दे! इस तरह जब मर्द की मनी औरत के रहम मे नहीं पहुंचती है तो हमल करार नही पाता!_

     _हदीसों के मुताअला से मालुम होता है के नबी ए करीम ﷺ के जाहीरी जमाने मे भी कुछ सहाबा ए किराम औलाद की पैदाईश को रोकने के लिये अज़ल किया करते थे! चुनांचे इसका सुबुत अहादीस की सैकडों किताबो मे मिलता है!_

📚 *_हदीस :_* _हजरत जाबीर रदि अल्लाहु तआला अन्हु फर्माते है.........._
_"हम नबी ए करीम ﷺ के मुबारक जमाने मे अज़ल किया करते थे, हालांकी कुरआन ए करीम नाजील हो रहा था!"_ _हजरत मुहद्दीस इमाम तिर्मीजी रदि अल्लाहु तआला अन्हु इस हदीस के मुतअल्लीक इर्शाद फर्माते है के यह हदीस हसन सही है!_
📚 *_[तिर्मीजी शरीफ,जिल्द 1 सफ: नं-583]_*

📚 *_हदीस :_* _मिश्कात व मुस्लीम शरीफ मे सहाबी ए रसुल हजरत जाबीर रदि अल्लाहु तआला अन्हु से यह रिवायत मरवी है के.............. "अज़ल के मुतअल्लीक हुजुर ﷺ को खबर पहुंची लेकीन आपने हमे मना न फर्माया!"_

📚 *_[मुस्लीम शरीफ,जिल्द 1 सफ: नं-465, मिश्कात शरीफ जिल्द 2 सफ: नं-87]_*  *________________________________________*
💫 *_खुलासा_* _अज़ल करने का मक्सद यह होता है की हमल न ठहरे (यानी औलाद की पैदाईश को रोका जा सके) इस मक्सद के तहत मर्द अपनी मनी को औरत के रहम मे जाने से रोकता है! यही मक्सद *निरोध*  से हासील होता है! चुनांचे अज़ल पर क्यास करके यह कहा जा सकता है की जिस तरह अज़ल नाजाइज नही इसी तरह *निरोध* का इस्तेमाल भी नाजाइज नही होंगा! क्यो के अज़ल और *निरोध* दोनो से एक ही मक्सद हासील होता है!_

👉🏻     _अहादिस व फिक्ह की मुस्तनद किताबो मे यह नक्ल है की अज़ल अपनी बीवी की इजाजत के बगैर नही कर सकता!_

📚 *_हदीस :_* _इमाम अबदुर्रज्जाक और इमाम बैहकी  हजरत इब्ने अब्बास और इमाम तिर्मीजी, इमाम मालीक बिन अनस  रदी अल्लाहु तआला अन्हुम रिवायत करते है की........._

_"आजाद औरत  (यानी बीवी) से बगैर उसकी इजाजत के अज़ल मना है!"_
📚 *_[बैहकी, तर्मीजी शरीफ,जिल्द 1 बाब नं- 773 हदीस नं-1134 सफ: नं-583]_*

📚 *_हदीस :_* _अमीरुल मोमिनीन हजरत उमर फारुख रदी अल्लाहु तआला अन्हु से रिवायत है........._
_" रसुलुल्लाह ﷺ ने आजाद औरत (बीवी) से बगैर उसकी इजाजत के अज़ल करने से मना फर्माया"!_
📚 *_[इब्ने माजा जिल्द 1, बाब नं-618, सफ नं-539]_*

📚 *_हदीस :_* _हजरत इमाम मालीक  रदी अल्लाहु तआला अन्हु फर्माते है........._
*_"कोई अपनी बीवी से अज़ल न करे मगर उसकी इजाजत से"_*

📚 *_[मुअत्ता इमाम मालीक  जिल्द 2, बाब नं-34, सफ नं-476]_*
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👉🏻      _मुसन्नीफ ने अपने तौर पर जो तहकीक की उसमे यह पाया की मसअला अज़ल मे हन्फीया,मालकीया और शाफई के दर्म्यान इख्तिलाफ है! हनफी और मालीकी आजाद औरत से (यानी बीवी) से अज़ल बगैर उसकी इजाजत के मकरुह जानते है! जबकी शाफई बगैर किसी कराहत के बिला इम्तियाज जाइज ख्याल करते है! मगर यह की औलाद से बचने की गर्ज से हो तो उस वक्त यह उनके नज्दीक भी मकरूह है!_

💫     _इन तमाम अहादीस से मालुम हुआ की औरत से जिमआ से पहले अज़ल करने या निरोध के इस्तेमाल की इजाजत जरुरी है! हनफी मजहब की बिना इस वज्हे अक्ली पर है की *जिमाअ दरअसल बीवी का शौहर पर हक है! और बजाहीर जिमआ वही माना जाता है जिसमे अज़ल न हो* लिहाजा अगर उसके खिलाफ यानी अज़ल की सुरत मत्लुब हो तो साहीबे हक (यानी अपनी बीवी) से  अज़ल की इजाजत तलब करनी जरुरी है, और अगर बीवी अज़ल से या मौजुदा दौर मे *निरोध* (कंडोम) के इस्तेमाल से मना करे तो फिर उसे इस्तेमाल मे नही ला सकता!_

💫 *_अभी आप पढ चुके की अज़ल नाजाइज नही लेकीन तस्वीर का एक दुसरा रुख और भी है! वह इंशा अल्लाह तआला अगले पार्ट मे पढे......._*
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