*【POST 18】नींद से वुज़ू कब टूटता है*?

       अक्सर देखा गया है कि मस्जिद के अन्दर नमाज के इन्तजार मे लोग बैठे हैं और उन्हें नींद की झपकी आ गई या ऊँघने लगे तो वह समझते हैं हमारा वुज़ू टूट गया और वह अज खुद या किसी के टोकने से वुज़ू करने लगते हैं यह ग़लत है।
              *_मसअला यह है कि ऊँघने या बैठे बैठे झोंक लेने से वुज़ू नही जाता ।_*

     📗  *(बहारे शरीअत हिस्सा दोम सफहा 27)*

     तिर्मिजी और अबू दाऊद की हदीस मे है रसूलुल्लाह सल्लल्लाहो तआला अलह वसल्लम के सहाबए किराम मस्जिद शरीफ मे नमाजे इशा के इन्तजार मे बैठे बैठे सोने लगते थे यहाँ तक कि उनके सर नींद की बजह से झुक झुक जाते थे फिर वह दोबाराबगैरवुज़ूकिये नमाज पढ़ लेते थे।

   📕 *(मिश्कात मायूजिबुल वुज़ू सफहा 41)*

    नींदसे वुज़ूतब टूटता है जब ये दोनो शर्ते पाई जाये।
*(1) दोनो सुरीन उस वक्त खूब जमे न हो।*
*(2) सोने की हालत गाफिल होकर सोने से मानेअ न हो।*

        📗 *(फतावा रजविया जिल्द 1 सफहा 71)*

चित या पट या करवट से लेट कर सोने से वुज़ूटूट जाता है। उकङू बैठा हो और टेक लगा कर सो गया तो वुज़ू टूट जाएगा। पाँव फैला कर बैठे बैठे सोने से वुज़ू नही टूटता चाहे टेक लगाए हुए हो खड़े खड़े या चलते हुए या नमाज की हालत मे कयाम मे या रूकू मे या दो जानू सीधे बैठ कर या सज्दे  मे जो तरीका मर्दो के लिए सुन्नत है उस पर सो गया तो वुज़ू नही जाएगा हाँ अगर नमाज मे नींद की वजह से गिर पड़ा अगर फौरन आंख खुल गईतो ठीक वरना वुज़ू जाता रहा बैठे हुए ऊँघने और झपकी लेने से वुज़ू नही जाता हैं।

📚 *गलत फ़हमियाँ और उनकी इस्लाह सफहा, 24 25*

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