कुछ लोग समधन चच्ची और मुमानी से निकाह को हराम जानते हैं हालांकि समधन से निकाह बिला शक जाइज़ है, यूँ ही चच्ची और मुमानी से भी निकाह में कोई हर्ज नहीं जबकि उनके शौहरों ने उन्हें तलाक दे दी हो या वो मर चुके हों तो इद्दत के बाद समधन, चच्ची और मुमानी से निकाह जाइज़ है। जो लोग इन निकाहों को हराम जानते हैं, वो जाहिल हैं।
*(हवाले के लिए देखिए)*
*(मलफूज़ाते आला हजरत अलैहिर्रहमह जिल्द सोएम सफा 10 और दूतावा अफ्रीका सफ़ा 100)*
📚 *गलत फ़हमियाँ और उनकी इस्लाह सफहा,78*
*Note- अल्लाह अल्लाह आज हमारी गैरत हमी को धिक्कार ती है। आज हम अपने इस्लाम से कितने दूर हो गए है। जिसका खामियाज़ा हमे अपने शरीअत के क़ानून से खिलवाड़ करने पर उठाना पड़ रहा है। आज हम सोचने पर मजबूर हो जाते है। क्या हमी वह 313 उहद की जमात है। क्या हमी कर्बला के 82 जा निसार है। मुसलमानो ऊहद के मैदान मे कोई और नही हमारे प्यारे आक़ा सल्लल्लाहो तआला अलह वसल्लम और सहाबा इकराम थे जिनको देखकर लाखों का लश्कर लरज ता था। वज़ह कभी किसी को सताया नही कभी किसी का हक दबाया नही सबसे बड़ी बात मैदाने ऊहद मे भी नमाज़ कज़ा न हुई। यही दर्श हमे कर्बला के मैदान मे हमारे इमाम हुसैन रदीअल्लाहो तआला अन्हुमा ने दिया है। अफसोश आज हमे फिक्र नही नमाज़ की और कहते है हम परेशान है। हमे सताया जा रहा है। वज़ह खुद हम है। और इल्जाम दूसरो पर डालते है।*
*किसी शायर ने क्या खूब कहा है।?*
*न समझोगे तो मिट जाओगे अए हिन्दी मुसलमानो*
*तुम्हारी दास्ताँ तक न होगी दास्ताँनो मे*
*कहने का मकसद सिर्फ़ इतना है। नमाज़ पढ़ो शरीअत को समझो अपने उल्माऔ की बात मानों कसम ख़ुदा की जिस दिन हमारी मसाजिद पाँच वक़्त जुमा जितनी भरी नज़र आने लगेंगी उस दिन दुश्मनों को सोचने पर मजबूर कर देगें इन्शा अल्लाह तआला नमाज़ क़ायम करो*
*(हवाले के लिए देखिए)*
*(मलफूज़ाते आला हजरत अलैहिर्रहमह जिल्द सोएम सफा 10 और दूतावा अफ्रीका सफ़ा 100)*
📚 *गलत फ़हमियाँ और उनकी इस्लाह सफहा,78*
*Note- अल्लाह अल्लाह आज हमारी गैरत हमी को धिक्कार ती है। आज हम अपने इस्लाम से कितने दूर हो गए है। जिसका खामियाज़ा हमे अपने शरीअत के क़ानून से खिलवाड़ करने पर उठाना पड़ रहा है। आज हम सोचने पर मजबूर हो जाते है। क्या हमी वह 313 उहद की जमात है। क्या हमी कर्बला के 82 जा निसार है। मुसलमानो ऊहद के मैदान मे कोई और नही हमारे प्यारे आक़ा सल्लल्लाहो तआला अलह वसल्लम और सहाबा इकराम थे जिनको देखकर लाखों का लश्कर लरज ता था। वज़ह कभी किसी को सताया नही कभी किसी का हक दबाया नही सबसे बड़ी बात मैदाने ऊहद मे भी नमाज़ कज़ा न हुई। यही दर्श हमे कर्बला के मैदान मे हमारे इमाम हुसैन रदीअल्लाहो तआला अन्हुमा ने दिया है। अफसोश आज हमे फिक्र नही नमाज़ की और कहते है हम परेशान है। हमे सताया जा रहा है। वज़ह खुद हम है। और इल्जाम दूसरो पर डालते है।*
*किसी शायर ने क्या खूब कहा है।?*
*न समझोगे तो मिट जाओगे अए हिन्दी मुसलमानो*
*तुम्हारी दास्ताँ तक न होगी दास्ताँनो मे*
*कहने का मकसद सिर्फ़ इतना है। नमाज़ पढ़ो शरीअत को समझो अपने उल्माऔ की बात मानों कसम ख़ुदा की जिस दिन हमारी मसाजिद पाँच वक़्त जुमा जितनी भरी नज़र आने लगेंगी उस दिन दुश्मनों को सोचने पर मजबूर कर देगें इन्शा अल्लाह तआला नमाज़ क़ायम करो*
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