हमल की हालत में तलाक वाकेअ हो जाती है। यह जो कुछ लोग समझते हैं कि औरत हमल से हो और उस हालत में शौहर तलाक़ दे तो तलाक वाक़ेअ नहीं होती, यह उनकी गलतफहमी है।
*सय्यिदी आला हज़रत इमामे अहले सुन्नत इरशाद फरमाते*
*(रदिअल्लाहो तआला अन्हुमा)*
*_‘‘जाइज़ व हलाल है अगरचे अय्यामे हमल में दी गई हो।’’_*
📗 *(फतावा रजविया जिल्द 5 सफ़ा 625)*
📚 *गलत फ़हमियाँ और उनकी इस्लाह सफहा 78*
*Note- बाज़ लोग हालात ए हमल मे तलाक़ को वाकेअ नही समझते यह उनकी गुमराही जहालत है। बल्की ऐसी सूरत मे तलाक़ वाक़ेअ हो जाता है। मेरा ऐसे मर्द और औरत को मसवरा अल्लाह तआला को हालाल काम मे सबसे ज्यादा न पंसन्दीदा चीज तलाक़ है। क्या बगैर कोई उज्र के ऐसा काम सही है। जो अल्लाह तआला को भी पसन्द न हो अपनी शादी शुदा जिन्दगी को शीरत ए मुस्ताफा का दर्श दो शीरत ए अम्बिया का दर्श दो शीरत ए सहाबा का दर्श दो शीरत ए ओलिया का दर्श दो फिर देखना तुम्हारी जिन्दगी भे अल्लाह तआला कितनी खुशियाँ अता करेगा बे वज़ह की लड़ाई झगड़ो से बचने का एक आशान तरीका गल्ती किसी की भी हो पर सबसे पहलें मनाने बाला ही सबसे ताक़त बर है। और बहादुर है।*
*_क्या हाशिल होगा अपनी मै मे अगर आप रहेगे आपकी ज़िन्दगी जहन्नम बनती नजर आएगी एक बार ही अपने प्यारे आका सल्लल्लाहो तआला अलह वसल्लम का तसव्वुर कर लिया करे हमारे आका को हमारी माँ हजरते सैय्यदना आयशा रदिअल्लाहो तआला अन्हा से किस कदर मोहब्बत थीं क्या हम ज़र्रा बराबर भी इस किरदार को नही अपना सकतें है। यकीन जानो अगर शीरत ए मुस्ताफा की एक जर्रा बराबर बात पर अमल किया तो ज़िन्दगी आसान हो जाएगी। बरना इस दौर मे परेशानिया हर किसी को है। कोई चैन और सुकून मे नही है। वज़ह हमने इस्लाम के कानून को समझना ही बन्द कर दिया है। अगर समझा होता तो मज़ाल क्या किसी शियासत की जो उँगली उठाती और हमे चेलेन्ज करती अभी भी वक़्त है। अपने आपको समझो और पहचानो अल्लाह तआला का शुक्र व अहशान मानो कितना प्यारा मजहब अता किया।_*
*सय्यिदी आला हज़रत इमामे अहले सुन्नत इरशाद फरमाते*
*(रदिअल्लाहो तआला अन्हुमा)*
*_‘‘जाइज़ व हलाल है अगरचे अय्यामे हमल में दी गई हो।’’_*
📗 *(फतावा रजविया जिल्द 5 सफ़ा 625)*
📚 *गलत फ़हमियाँ और उनकी इस्लाह सफहा 78*
*Note- बाज़ लोग हालात ए हमल मे तलाक़ को वाकेअ नही समझते यह उनकी गुमराही जहालत है। बल्की ऐसी सूरत मे तलाक़ वाक़ेअ हो जाता है। मेरा ऐसे मर्द और औरत को मसवरा अल्लाह तआला को हालाल काम मे सबसे ज्यादा न पंसन्दीदा चीज तलाक़ है। क्या बगैर कोई उज्र के ऐसा काम सही है। जो अल्लाह तआला को भी पसन्द न हो अपनी शादी शुदा जिन्दगी को शीरत ए मुस्ताफा का दर्श दो शीरत ए अम्बिया का दर्श दो शीरत ए सहाबा का दर्श दो शीरत ए ओलिया का दर्श दो फिर देखना तुम्हारी जिन्दगी भे अल्लाह तआला कितनी खुशियाँ अता करेगा बे वज़ह की लड़ाई झगड़ो से बचने का एक आशान तरीका गल्ती किसी की भी हो पर सबसे पहलें मनाने बाला ही सबसे ताक़त बर है। और बहादुर है।*
*_क्या हाशिल होगा अपनी मै मे अगर आप रहेगे आपकी ज़िन्दगी जहन्नम बनती नजर आएगी एक बार ही अपने प्यारे आका सल्लल्लाहो तआला अलह वसल्लम का तसव्वुर कर लिया करे हमारे आका को हमारी माँ हजरते सैय्यदना आयशा रदिअल्लाहो तआला अन्हा से किस कदर मोहब्बत थीं क्या हम ज़र्रा बराबर भी इस किरदार को नही अपना सकतें है। यकीन जानो अगर शीरत ए मुस्ताफा की एक जर्रा बराबर बात पर अमल किया तो ज़िन्दगी आसान हो जाएगी। बरना इस दौर मे परेशानिया हर किसी को है। कोई चैन और सुकून मे नही है। वज़ह हमने इस्लाम के कानून को समझना ही बन्द कर दिया है। अगर समझा होता तो मज़ाल क्या किसी शियासत की जो उँगली उठाती और हमे चेलेन्ज करती अभी भी वक़्त है। अपने आपको समझो और पहचानो अल्लाह तआला का शुक्र व अहशान मानो कितना प्यारा मजहब अता किया।_*
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