कुछ लोग समझते हैं कि शौहर अगर बीवी को तलाक दे तो तलाक के अलफाज का औरत के लिए सुनना और औरत का तलाक के वक़्त सामने होना ज़रूरी है। यह गलतफहमी है। औरत अगर न सुने और वहाँ मौजूद भी न हो तब भी शौहर के तलाक देने से तलाक हो जायेगी चाहे शौहर और बीवी में हज़ारों मील का फ़ासिला हो।
*आलाहजरत इमाम अहले सुन्नत सय्यिदी शाह अहमद रज़ा खाँ साहब रदियल्लाहु तआला अन्हु* इरशाद फरमाते हैं।
*‘तलाक के लिए औरत का वहाँ हाज़िर होना कोई शर्त नहीं।*
📗 *(फ़तावा रजविया जिल्द 5 सफ़ा 618)*
📚 *गलत फ़हमियाँ और उनकी इस्लाह सफहा,77*
*Note- अलहमदो लिल्लाह कल मेरे अखलाक भरे लहजे मे जो पोस्ट के जरिए मेने अपनी बात पहुँचाई थी अल्लाह तआला के फज्ल से उन अल्फाज़ो को मेरे सामने बाले के पर दिल पर अशर हुआ और रूज़ू भी किया तौबा भी कि और अल्लाह तआला के फ़ज्ल से उन्होने अहिद भी लिया आइंदा किसी आलिम के लिए गलत अल्फाज़ नही बोलेगे अल्लाह तआला उनकी तौबा को अपनी बारगाह मे क़ुबूल फरमाए है। और हम गुनहगारों को अपने उल्माओ का अहितराम करने की तौफीक अता फरमाए।*
*आमीन सुम्मा आमीन या रब्बुल आलमीन*
*आलाहजरत इमाम अहले सुन्नत सय्यिदी शाह अहमद रज़ा खाँ साहब रदियल्लाहु तआला अन्हु* इरशाद फरमाते हैं।
*‘तलाक के लिए औरत का वहाँ हाज़िर होना कोई शर्त नहीं।*
📗 *(फ़तावा रजविया जिल्द 5 सफ़ा 618)*
📚 *गलत फ़हमियाँ और उनकी इस्लाह सफहा,77*
*Note- अलहमदो लिल्लाह कल मेरे अखलाक भरे लहजे मे जो पोस्ट के जरिए मेने अपनी बात पहुँचाई थी अल्लाह तआला के फज्ल से उन अल्फाज़ो को मेरे सामने बाले के पर दिल पर अशर हुआ और रूज़ू भी किया तौबा भी कि और अल्लाह तआला के फ़ज्ल से उन्होने अहिद भी लिया आइंदा किसी आलिम के लिए गलत अल्फाज़ नही बोलेगे अल्लाह तआला उनकी तौबा को अपनी बारगाह मे क़ुबूल फरमाए है। और हम गुनहगारों को अपने उल्माओ का अहितराम करने की तौफीक अता फरमाए।*
*आमीन सुम्मा आमीन या रब्बुल आलमीन*
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