_औरत के बीस बच्चे हो जायें तो उसका निकाह टूट जाता है, यह एक आमियाना और ख़ालिस जाहिलाना ख्याल है। सही बात यह है कि बच्चे बीस हो जाये या इससे भी ज़्यादा, उसके निकाह पर कोई फर्क नहीं पड़ता और पहला निकाह बाक़ी रहता है। दोबारा निकाह की कोई ज़रूरत नहीं है।_
📚 *गलत फ़हमियाँ और उनकी इस्लाह सफहा,80*
*_Note :- अल्लाह तआला का शुक्र है। मे घर खैरिअत से पहुँचा गया था। वक़्त मुनासिब नही था जिसकी बजह कल पोस्ट नही कर पाया इसके लिए आप तमाम हजरात से माजरत चाहूँगा। मे ऐसी जगह गया था जहाँ पर चौबीस नम्बर का गढ़ कहा जाता है। यानी बहाबी देवबंदी का गढ़ भोपाल मध्य प्रदेश को लेकिन अल्हमदो लिल्लाह जब तक मेरे ताजोहश्शरिया अलहिर्रहमा की भोपाल मे आमद आमद नही हुई थी तब तक बहा बताते है। लोग 365 मस्जिद इससे भी ज़्यादा उनमे सिर्फ़ एक मस्जिद सुन्नियो की थी लेकिन मेरे ताजेशरीअत की आमद के बाद कई लोग़ आप के हाथ पर हाथ देकर दाखिले इस्लाम हुए और आज बहा 7 8 मस्जिद सुन्नियो की है। मे जहा पर रूका हुआ था मेरे अजीज और गुलामे ताजोहश्शरिया शायरे इस्लाम जनाब शोएब रजा कादरी साहब जो झाँसी के है। पर इस वक़्त भोपाल मे रहते है। अल्हमदो लिल्लाह शोएब भाई ने बहुत इज्जत दी और बहुत अच्छी तरीके से महमान नवाजी की अल्लाह तआला उन्हे हर मकाम पर कामयाबी अता फरमाए। वह इलाका और एरिया देख कर इतनी खुशी हुईँ वहा के लोगों ने गुमराह लोगों से बचने के लिए मस्जिद की तामीर करवाई जिसका नाम सकलैन मस्जिद है। आशोक गार्डन मे और अपनी सहूलियत के लिए अपने एरिया मे सुन्नी कसाई का इन्तजाम भी किया है।_*
*मेरे कहने का फक़त इतना मतलब है। अगर इन्सान अपने इमान बचाने की सोच ले तो हर काम आसान हो जाए जेसा मेने अभी ऊपर बयान किया है। यहाँ के लोग अपने इमान बचाने के लिए हर काम करने को तैयार है। लेकिन बातिल के आगे सर झुकाने को नही मेरा ऐसे लोगों को तहे दिल से सलाम है। सबसे अहिम बात वहा के एक शख्स से मुझे कलमें का मतलब इतनी डिटेल से समझाया जो मेरे दिल मे घर कर गया हकीकत है। अगर मुसलमान ने पहले कलमे को समझ लिया तो दुनिया की ताकत अल्लाह तआला और उसके रसूल सल्लल्लाहो तआला अलह वसल्लम से कभी ज़ुदा नही कर सकती है।*
*दुआ है। अल्लाह तआला से हम सब सुन्नियो को अपने हबीब सल्लल्लाहो तआला अलह वसल्लम का सच्चा बफादार बनाए।*
📚 *गलत फ़हमियाँ और उनकी इस्लाह सफहा,80*
*_Note :- अल्लाह तआला का शुक्र है। मे घर खैरिअत से पहुँचा गया था। वक़्त मुनासिब नही था जिसकी बजह कल पोस्ट नही कर पाया इसके लिए आप तमाम हजरात से माजरत चाहूँगा। मे ऐसी जगह गया था जहाँ पर चौबीस नम्बर का गढ़ कहा जाता है। यानी बहाबी देवबंदी का गढ़ भोपाल मध्य प्रदेश को लेकिन अल्हमदो लिल्लाह जब तक मेरे ताजोहश्शरिया अलहिर्रहमा की भोपाल मे आमद आमद नही हुई थी तब तक बहा बताते है। लोग 365 मस्जिद इससे भी ज़्यादा उनमे सिर्फ़ एक मस्जिद सुन्नियो की थी लेकिन मेरे ताजेशरीअत की आमद के बाद कई लोग़ आप के हाथ पर हाथ देकर दाखिले इस्लाम हुए और आज बहा 7 8 मस्जिद सुन्नियो की है। मे जहा पर रूका हुआ था मेरे अजीज और गुलामे ताजोहश्शरिया शायरे इस्लाम जनाब शोएब रजा कादरी साहब जो झाँसी के है। पर इस वक़्त भोपाल मे रहते है। अल्हमदो लिल्लाह शोएब भाई ने बहुत इज्जत दी और बहुत अच्छी तरीके से महमान नवाजी की अल्लाह तआला उन्हे हर मकाम पर कामयाबी अता फरमाए। वह इलाका और एरिया देख कर इतनी खुशी हुईँ वहा के लोगों ने गुमराह लोगों से बचने के लिए मस्जिद की तामीर करवाई जिसका नाम सकलैन मस्जिद है। आशोक गार्डन मे और अपनी सहूलियत के लिए अपने एरिया मे सुन्नी कसाई का इन्तजाम भी किया है।_*
*मेरे कहने का फक़त इतना मतलब है। अगर इन्सान अपने इमान बचाने की सोच ले तो हर काम आसान हो जाए जेसा मेने अभी ऊपर बयान किया है। यहाँ के लोग अपने इमान बचाने के लिए हर काम करने को तैयार है। लेकिन बातिल के आगे सर झुकाने को नही मेरा ऐसे लोगों को तहे दिल से सलाम है। सबसे अहिम बात वहा के एक शख्स से मुझे कलमें का मतलब इतनी डिटेल से समझाया जो मेरे दिल मे घर कर गया हकीकत है। अगर मुसलमान ने पहले कलमे को समझ लिया तो दुनिया की ताकत अल्लाह तआला और उसके रसूल सल्लल्लाहो तआला अलह वसल्लम से कभी ज़ुदा नही कर सकती है।*
*दुआ है। अल्लाह तआला से हम सब सुन्नियो को अपने हबीब सल्लल्लाहो तआला अलह वसल्लम का सच्चा बफादार बनाए।*
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