*_आजकल ज्यादातर लोग इसलिए मुरीद होते हैं कि हम मालदार हो जायेंगे या दुनयवी नुक़सानात से महफूज़ रहेंगे। कितने लोग यह कहते सुने जाते हैं कि हम फलां पीर साहब से मुरीद हो कर खुशहाल और मालदार हो गए अफ़सोस का मक़ाम है कि जो पीरी मुरीदी कभी रुश्द व हिदायत ईमान की हिफ़ाज़त और शफाअत और जन्नत हासिल करने का ज़रिआ ख्याल की जाती थी आज वह हुसूले दौलत व इमारत या सिर्फ नक्श व तावीज़ पढ़ना और फ़ूकना बन कर रह गई। अब शायद ही कोई होगा जो अहले इल्म व फ़ज़्ल उलमा, सुलहा या मज़ाराते मुकद्दसा पर इस नियत से हाजिरी देता हो कि उनसे गुनाहों की मगफिरत और ख़ात्मा अलल ईमान की दुआ करायेंगे।_*
_इस्लाम में दुनिया को महज एक खेल तमाशा कहा गया और आख़िरत को बाकी रहने वाली, लेकिन जिसका पता नहीं कब साथ छोड़ जाए उसको संवारने, बनाने में लग गए और जहाँ सब दिन रहना है उसको भुला बैठे। हदीसे पाक में अल्लाह के *रसूल ﷺ* ए ने इरशाद फ़रमाया :_
*_‘‘जब तुम किसी बन्दे को देखो कि अल्लाह उसको गुनाहों के बावुजूद दुनिया दे रहा है जो भी वह बन्दा चाहता है तो यह ढील है यानी अगर कोई बन्दा गुनाह करता रहे मगर हक तआला की तरफ से बजाए पकड़ के नेमतें मिल रही हैं तो यह नेमतें नहीं बल्कि अज़ाब है। रात दिन दौलत कमाने में लगे रहने वाले अब मस्जिदों खानकाहों में भी कभी आते हैं तो सिर्फ दौलते दुनिया और ऐश व आराम की फिक्र लेकर किस कद्र महरूमी है। खुदाए तआला आख़िरत की फिक्र करने की तौफ़ीक अता फरमाए।_*
📚 *गलत फ़हमियाँ और उनकी इस्लाह सफहा,93,94*
_इस्लाम में दुनिया को महज एक खेल तमाशा कहा गया और आख़िरत को बाकी रहने वाली, लेकिन जिसका पता नहीं कब साथ छोड़ जाए उसको संवारने, बनाने में लग गए और जहाँ सब दिन रहना है उसको भुला बैठे। हदीसे पाक में अल्लाह के *रसूल ﷺ* ए ने इरशाद फ़रमाया :_
*_‘‘जब तुम किसी बन्दे को देखो कि अल्लाह उसको गुनाहों के बावुजूद दुनिया दे रहा है जो भी वह बन्दा चाहता है तो यह ढील है यानी अगर कोई बन्दा गुनाह करता रहे मगर हक तआला की तरफ से बजाए पकड़ के नेमतें मिल रही हैं तो यह नेमतें नहीं बल्कि अज़ाब है। रात दिन दौलत कमाने में लगे रहने वाले अब मस्जिदों खानकाहों में भी कभी आते हैं तो सिर्फ दौलते दुनिया और ऐश व आराम की फिक्र लेकर किस कद्र महरूमी है। खुदाए तआला आख़िरत की फिक्र करने की तौफ़ीक अता फरमाए।_*
📚 *गलत फ़हमियाँ और उनकी इस्लाह सफहा,93,94*
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