*【POST 95】बुजुर्गों की तसवीरें घरों मे रखना?*

*_आजकल बुजुर्गाने दीन की तसवीरें और उनके फोटो घरों दुकानों में रखने का भी रिवाज हो गया है। यहाँ तक कि कुछ लोग पीरों वलियों की तसवीरें फ्रेम में लगा कर घरों में सजा लेते हैं और उन पर मालायें डालते अगरबत्तियां सुलगाते यहाँ तक कि कुछ जाहिल अनपढ़ उनके सामने मुशरिकों, काफ़िरों बुतपरस्तों की तरह हाथ बांध कर खड़े हो जाते हैं। ये बातें सख्त तरीन हराम, यहाँ तक कि कुफ्र अन्जाम हैं बल्कि यह हाथ बांध कर सामने खड़ा होना उन पर फूल मालायें डालना यह काफ़िरों का काम है।_*

_सय्यिदी आला हज़रत मौलाना शाह अहमद रज़ा खाँ साहब अलैहिर्रहमाह* इरशाद फरमाते हैं । :_

*_‘‘अल्लाह अज़्ज़वजल इबलीस के मक्र से पनाह दे। दुनिया में बुत परस्ती की इब्तिदा यूंही हुई कि अच्छे और नेक लोगों की मुहब्बत में उनकी तसवीरें बना कर घरों और मस्जिदों में तबर्रुकन रख ली। धीरे धीरे वही मअबूद हो गई।_*

📗 *(फ़तावा रजविया, जिल्द 10, किस्त 2, मतबूआ बीसलपुर सफ़हा 47)*

_*बुखारी शरीफ़* और *मुस्लिम शरीफ़* की हदीस में है कि , सुवा, यगूस, यऊक और नसर जो मुशरिकीन के मअबूद और उनके बुत थे जिनकी वह परसतिश करते थे जिनका जिक्र *कुर्आने करीम* में भी आया है। यह सब कौमे नूह के नेक लोग थे उनके विसाल हो जाने के बाद कौम ने उनके मुजसमे बना कर अपने घरों में रख लिये उस वक्त सिर्फ मुहब्बत में ऐसा किया गया था। लेकिन बाद के लोगों ने उनकी इबादत और परसतिश शुरू कर दी। इस किस्म की हदीसें कसरत से हदीस की किताबों में आई हैं।_

*_खुलासा यह कि तसवीर फोटो इस्लाम में हराम हैं। और पीरों वलियों, अल्लाह वालों के फोटो और उनकी तसवीरें और ज़्यादा हराम हैं। काफ़िरों इस्लाम दुश्मन ताकतों की साज़िशें चल रही हैं वह चाहते हैं कि तुमको अपनी तरह बनायें और तुम से कुफ्र करायें खुद भी जहन्नम में जायें और तुमको भी जहन्नम में ले जायें।_*

📚 *गलत फ़हमियाँ और उनकी इस्लाह सफहा,94,95*

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