*_﷽-الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ الله ﷺ_* *______________________________________* 《[इस्लामी हैरत अंगेज़ मालूमात पोस्ट(44)]》 *______________________________________* *《हजरत आदम अलैहिस्सलाम का बयान पोस्ट(4)》* *______________________________________*


सवाल- हजरत आदम अलैहिस्सलाम की पैदाइस किस दिन और किस जगह हुई?
*जवाब- आप जुमा के दिन उस जगह कतमे आदम से मनसए वजूद में आए जहाँ आज ख़ाना-ए-क़ाबा है।*
(तफ़सीर नईमी जिल्द1सफ़्हा309व318)

सवाल- हज़रत आदम अलैहिस्सलाम को सबसे पहले किस फ़रिश्ते ने सज्दा किया?
*जवाब- सबसे पहले सिदरत नशीन जिब्राईल अलैहिस्सलाम अमीन ने सज्दा किया फिर मीकाईल अलैहिस्सलाम ने फिर इसराफील अलैहिस्सलाम ने फिर इजराईल अलैहिस्सलाम ने फिर सारे फ़रिश्तों ने सज्दा किया ताअत में सबक़त करने की वजह से रूहुल अमीन को सबसे बड़ा दर्जा अता किया गया यानी ख़िदमते अंबिया अलैहिस्सलाम और तफ़सीर नईमी ही में तफसीर रुहुल बयान के हवाले से मस्तूर व मज्कूर है कि बाज़ हज़रात फरमाते है कि सबसे पहले हज़रत इसराफील अलैहिस्सलाम ने सज्दा किया इसी वजह से उनकी जबीं मुबारक पर सारा कुरआन लिख दिया गया।*
(ख़ज़ाईनुल इरफान पारा1रुकू4/तफ़सीर नईमी जिल्द1सफ़्हा309)

सवाल- हजरत आदम अलैहिस्सलाम को किया जाने वाला सज्दा कितनी देर का था?
*जवाब- इस मुताल्लिक आइम्मा तफ़सीर इख्तिलाफ रखते हैं(1)यह सज्दा रोज़े जुमा वक़्ते जवाल से असर तक किया गया(2)फ़रिश्ते सौ बरस तक सज्दे में गिरे रहे(3)मलाइका पाँच सौ बरस तक सज्दे में गिरे रहे।इन मुख्तलिफ कौलों को इस तरह जमा किया जा सकता है कि अवल्लन मलाइका ने हजरत आदम अलैहिस्सलाम को सज्दा किया जिसका इब्लीस पुरतब्लीस ने इंकार किया यह सज्दा थोड़ी देर तक रहा फिर फ़रिश्तों ने सर उठाकर देखा कि शैतान नाफ़रमान हजरत आदम अलैहिस्सलाम की तरफ पीठ फेरे खड़ा है तब उन्होंने दुसरा सज्दा किया इस सज्दे की तौफीक रफ़ीक के शुक्र में यह सज्दा रब्बुल अरबाय जल्लेअला के लिए था और सज्दा-ए-शुक्र था फिर जब मलाइका मुकार्रिबीन साजिदीन ने सर उठाकर देखा तो शैतान मरदूद मतरूद और मक़हूर हो चुका है सूरत मसख़ होकर खिंजीर का सा जिस्म और बंदर का चेहरा हो गया तब फ़रिश्तों ने हैबते इलाही से एक सज्दा किया ये तीन सज्दे हजरत आदम अलै हिस्सलाम की ही तरफ थे लेकिन तीनों अलग अलग किस्म के और उनकी मुद्दते अलैहिदा अलैहिदा।*
(ख़ज़ाईनुल इरफान पारा1रुकु4/तफ़सीर नईमी जिल्द1सफ़्हा309/सावी जिल्द1सफ़्हा492/तफ़सीर नईमी जिल्द1सफ़्हा310)
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*हदीसे पाक में है कि इल्म फैलाने वाले के बराबर कोई आदमी सदक़ा नहीं कर सकता।*
(क़ुर्बे मुस्तफा,सफ़्हा100)
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