*मोअजज़ा ए हुज़ूर अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम* *पोस्ट नंबर 2⃣*


*🌙चाँद दो टुकड़े हो गया🌙*

✨रिवायतों में सबसे ज़्यादा सही और मुस्तनद हज़रते अब्दुल्लाह बिन मसऊद रदियल्लाहु तआला अन्हु की रिवायत है की जो बुखारी व मुस्लिम व तिर्मिज़ी वगैरह में मज़कूर है ! हज़रत अब्दुल्लाह बिन मसऊद रदियल्लाहु तआला अन्हु मौका पर मौजूद थे और उन्होंने इस मुअजिज़ा को अपनी आँखो से देखा ! *उनका बयान है कि~*

_*💫हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम* के ज़माने में चांद दो टुकड़े हो गया ! एक टुकड़ा पहाड़ के ऊपर और एक टुकड़ा पहाड़ के नीचे नज़र आ रहा था ! आपने कुफ्फार को ये मंज़र दिखा कर उनसे इरशाद फ़रमाया की गवाह हो जाओ, गवाह हो जाओ !_
*📚[बुखारी शरीफ़, जिल्द 2, सफा 721]*

🖋आला हज़रत फरमाते है~
*सूरज उलटे पाँव पलटे,*
*चाँद इशारे से हो चाक !*
*अंधे नजदी देख ले,*
*कुदरत रसुलुल्लाह की !!*
*➡जारी•••*

No comments:

Post a Comment

Our Social Sites