*मोअजज़ा ए हुज़ूर अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम* *पोस्ट नंबर 3⃣*


*☀सूरज पलट गया☀*

🗒इसका वाक़या ये है की हज़रते बीबी असमा बिन्ते उमैस रदियल्लाहु तआला अन्हा का बयान है की "ख़ैबर" के करीब "मंजिल सहबा" में *हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम* नमाज़े अस्र पढ़ कर हजरत अली रदियल्लाहु अन्हु की गोद में सर रख कर सो गए और आप पर "वही" नाज़िल होने लगी ! हज़रते अली सरे अक़दस को अपनी आग़ोश में लिए बेठे रहे यहाँ तक की सूरज गुरुब हो गया ! और आपकी नमाज़े अस्र क़ज़ा हो गयी !

❄जब वही ख़त्म हुई और आपने अपने सरे अक़दस को उठाया और आपको ये मालूम हुआ की हज़रते अली रदियल्लाहु अन्हु की नमाज़े अस्र क़ज़ा हो गयी है !  तो आपने दुआ फ़रमाई की *"या अल्लाह! यक़ीनन अली तेरी और तेरे रसूल की इताअत में थे लिहाज़ा तू सूरज को वापस लौटा दे ताकि अली नमाज़े अस्र अदा कर लें !"*

_💎हज़रते बीबी असमा बिन्ते उमैस कहती है की मैने अपनी आँखो से देखा की डूबा हुआ सूरज पलट आया और पहाडो की चोटियों पर और ज़मीन के उपर हर तरफ धुप फ़ैल गई !_
*📚(शिफ़ा शरीफ़, जिल्द 1, सफा 185)*

🖋आला हज़रत फरमाते है~
*साहिब रजअते शम्सो शक़्क़ुल क़मर,*
*नाइब दस्ते कुदरत पे लाखों सलाम !!*

*फ़र्श ता अर्श है जिस के ज़ेरे नगीं,*
*उसकी क़ाहिर रियासत पे लाखों सलाम*
*➡जारी•••*

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