*मोअजज़ा ए हुज़ूर अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम* *पोस्ट नंबर 4⃣*


*☁☁"मेराज"☁☁*

💎जमहूर उल्माए मिल्लत का सही मज़हब यही है की मेराज बहलाते बेदारी जिस्मों रूह के साथ सिर्फ एक बार हुई ! जम्हूर सहाबा व ताबेईन और फ़ुक़हा मुहद्दिसिन नीज़ सुफियेकेराम यही मज़हब है ! चुनाँचे अल्लामा हज़रते मुल्ला अहमद जैवन रहमतुल्लाह अलैह *(उस्ताद औरंगज़ेब आलमगिर बादशाह ने तहरीर फरमाया कि)~*

_✨और सबसे ज़्यादा सही कौल ये की मेराज़ बहलाते बेदारी जिस्मों रूह के साथ हुई ! यही अहले सुन्नत व जमाअत का मज़हब है ! लिहाज़ा जो शख्श ये कहे की मेराज़ फ़क़त रूहानी हुई या फ़क़त ख़्वाब में हुई वो सख़्श बिदती व गुमराह कुन फ़ासिक है !_
*(सिरतुल मुस्तफ़ा, सफ़ा 530)*

🖋आला हज़रत फरमाते है~
*लामकां तक जिसका उजाला वो है !*
*हर मकां का उजाला हमारा नबी !!*
*➡जारी•••*

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