*_﷽-الصــلوة والسلام عليك يارسول الله ﷺ_*
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《[इस्लामी हैरत अंगेज़ मालूमात पोस्ट(64)]》
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*《हुज़ूर नबी-ए-करीमﷺका बयान》*
*《पोस्ट (11)》*
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सवाल- हुज़ूर नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम की जाहिरी हयात तैय्यबा का वह कौनसा ज़माना है जो आपकी उम्र में शामिल नहीं है?
*जवाब- मैराज़ की सैर का ज़माना आप हुज़ूर नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम की उम्र शरीफ़ में शामिल नहीं क्योंकि उम्र जमीन पर जिंदा रहने की मुद्दत का नाम है।*
(तफ़्सीर नईमी 2/255)
सवाल- हिजरत के लिए हुज़ूर नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम किस माह कि किस तरीख को मक्का से रवाना हुए थे और किस तरीख को मदीना मुनव्वरा में रौनक अफ़रोज़ हुए?
*जवाब- हुज़ूर नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम मक्का से सत्ताइस सफ़र को निकले और ग़ारे सौर से रबीउल अव्वल को निकले और मदीना मुनव्वरा में रौनक अफ़रोज़ होने के मुताल्लिक उलमा-ए-सैर के दरमियान इस पर पूरा इत्तेफाक है वह मंगल का दिन था और महीना रविउल अव्वल का था लेकिन तारीख में इख़्तिलाफ़ है बाज़ बारह रबीउल अव्वल कहते हैं और बाज़ तेरह यह इख़्तिलाफ चांद की तारीख का इख़्तिलाफ़ है इमाम नुव्वी रहमतुल्लाह तआला अलैहि ने बारह रबीउल अव्वल पर जज़्म किया है।*
(मदारिज़ नबुव्वत 2/161)
सवाल- हुज़ूर नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने मदीना मुनव्वरा में जिस मकान में कयाम फ़रमाया था उस मकान को किसने बनाया था?
*जवाब- हज़रत इब्ने अब्बास रज़ियल्लाहु तआला अन्हु से मरवी है कि जब ताएफ के बादशाह तबा ने मदीना मुनव्वरा पर चढ़ाई की थी और उसने ऐलान किया था के मैं शहर मदीना को विरान कर दुंगा और उसके रहने वालों को अपने लड़के के इंतिक़ाल में कत्ल कर डालूंगा जैसे उन्होंने फ़रैब और धोके से कत़्ल किया है तो उस वक़्त सामोल यहुदी ने जो उस ज़माने में यहुदियों का सबसे बड़ा आलिम था उसने कहा ऐ बादशाह यह वह शहर है जिसकी तरफ़ नबी-ए-आख़िरुज़्ज़मा की हिजरत होगी और उस नबी की जाए विलायत मक्का मुकर्रमा है उनका इस्मे गिरामी अहमद है यह शहर उनका दारे हिजरत है और उनकी क़ब्रे अनवर भी इसी जगह होगी यह सब सुनकर तबा युंही वापस हो गया मुहम्मद बिन इस्हाक किताब मग़ाजी में नक़ल करते हैं तबा ने नबी आख़िरुज़्ज़मा के लिए एक आलीशान महल तामीर कराया तबा के साथ तौरैत के चार सौ आलिम भी थे जो तबा कि सोहबत छोड़ कर मदीना मुनव्वरा में इस आरजू में ठहर गए कि वह हुज़ूर नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम की सोहबत कि सआदत हासिल करेंगे तबा ने उन चार सौ आलिमों में से हर एक के लिए एक मकान बनवाया और उनको एक एक बांदी बख़्शी और उनको माले कसीर दिया तबा ने एक ख़त भी लिखा जिसमें अपने इस्लाम लाने की शहादत दी वह मकान जो ख़ातिमुन्नबी के लिए वनाया गया था वह हुज़ूर नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम के कदम रंजा फरमाने तक मौजूद रहा कहते हैं कि हज़रत अय्यूब अंसारी रज़ियल्लाहु तआला अन्हु का वह मकान जिसमें हुज़ूर नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने हिजरत के बाद नुज़ूल फ़रमाया था वही मकान है।*
(मदारिज़ नबुव्वत 1/204)
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*हदीसे पाक में है कि इल्म फैलाने वाले के बराबर कोई आदमी सदक़ा नहीं कर सकता।*
(क़ुर्बे मुस्तफा,सफ़्हा100)
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《[इस्लामी हैरत अंगेज़ मालूमात पोस्ट(64)]》
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*《हुज़ूर नबी-ए-करीमﷺका बयान》*
*《पोस्ट (11)》*
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सवाल- हुज़ूर नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम की जाहिरी हयात तैय्यबा का वह कौनसा ज़माना है जो आपकी उम्र में शामिल नहीं है?
*जवाब- मैराज़ की सैर का ज़माना आप हुज़ूर नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम की उम्र शरीफ़ में शामिल नहीं क्योंकि उम्र जमीन पर जिंदा रहने की मुद्दत का नाम है।*
(तफ़्सीर नईमी 2/255)
सवाल- हिजरत के लिए हुज़ूर नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम किस माह कि किस तरीख को मक्का से रवाना हुए थे और किस तरीख को मदीना मुनव्वरा में रौनक अफ़रोज़ हुए?
*जवाब- हुज़ूर नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम मक्का से सत्ताइस सफ़र को निकले और ग़ारे सौर से रबीउल अव्वल को निकले और मदीना मुनव्वरा में रौनक अफ़रोज़ होने के मुताल्लिक उलमा-ए-सैर के दरमियान इस पर पूरा इत्तेफाक है वह मंगल का दिन था और महीना रविउल अव्वल का था लेकिन तारीख में इख़्तिलाफ़ है बाज़ बारह रबीउल अव्वल कहते हैं और बाज़ तेरह यह इख़्तिलाफ चांद की तारीख का इख़्तिलाफ़ है इमाम नुव्वी रहमतुल्लाह तआला अलैहि ने बारह रबीउल अव्वल पर जज़्म किया है।*
(मदारिज़ नबुव्वत 2/161)
सवाल- हुज़ूर नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने मदीना मुनव्वरा में जिस मकान में कयाम फ़रमाया था उस मकान को किसने बनाया था?
*जवाब- हज़रत इब्ने अब्बास रज़ियल्लाहु तआला अन्हु से मरवी है कि जब ताएफ के बादशाह तबा ने मदीना मुनव्वरा पर चढ़ाई की थी और उसने ऐलान किया था के मैं शहर मदीना को विरान कर दुंगा और उसके रहने वालों को अपने लड़के के इंतिक़ाल में कत्ल कर डालूंगा जैसे उन्होंने फ़रैब और धोके से कत़्ल किया है तो उस वक़्त सामोल यहुदी ने जो उस ज़माने में यहुदियों का सबसे बड़ा आलिम था उसने कहा ऐ बादशाह यह वह शहर है जिसकी तरफ़ नबी-ए-आख़िरुज़्ज़मा की हिजरत होगी और उस नबी की जाए विलायत मक्का मुकर्रमा है उनका इस्मे गिरामी अहमद है यह शहर उनका दारे हिजरत है और उनकी क़ब्रे अनवर भी इसी जगह होगी यह सब सुनकर तबा युंही वापस हो गया मुहम्मद बिन इस्हाक किताब मग़ाजी में नक़ल करते हैं तबा ने नबी आख़िरुज़्ज़मा के लिए एक आलीशान महल तामीर कराया तबा के साथ तौरैत के चार सौ आलिम भी थे जो तबा कि सोहबत छोड़ कर मदीना मुनव्वरा में इस आरजू में ठहर गए कि वह हुज़ूर नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम की सोहबत कि सआदत हासिल करेंगे तबा ने उन चार सौ आलिमों में से हर एक के लिए एक मकान बनवाया और उनको एक एक बांदी बख़्शी और उनको माले कसीर दिया तबा ने एक ख़त भी लिखा जिसमें अपने इस्लाम लाने की शहादत दी वह मकान जो ख़ातिमुन्नबी के लिए वनाया गया था वह हुज़ूर नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम के कदम रंजा फरमाने तक मौजूद रहा कहते हैं कि हज़रत अय्यूब अंसारी रज़ियल्लाहु तआला अन्हु का वह मकान जिसमें हुज़ूर नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने हिजरत के बाद नुज़ूल फ़रमाया था वही मकान है।*
(मदारिज़ नबुव्वत 1/204)
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*हदीसे पाक में है कि इल्म फैलाने वाले के बराबर कोई आदमी सदक़ा नहीं कर सकता।*
(क़ुर्बे मुस्तफा,सफ़्हा100)
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