*_﷽-الصــلوة والسلام عليك يارسول الله ﷺ_*
*______________________________________*
《[इस्लामी हैरत अंगेज़ मालूमात पोस्ट(63)]》
*______________________________________*
*《हुज़ूर नबी-ए-करीमﷺका बयान》*
*《पोस्ट (10)》*
*______________________________________*
सवाल- हुज़ूर नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने कितनी बार तमामा अंबिया किराम व मुरसलीन अलैहिस्सलाम की इमामत फरमाई और कहां कहां?
*जवाब- आला हज़रत फ़ाजिले बरेलवी रहमतुल्लाह तआला अलैह फ़रमाते हैं अव्वलीन व आख़िरीन अंबिया व मुरसलीन अलैहिस्सलाम ने एक बार हुज़ूर नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम की इक़्तिदा में शबे मैराज को बैतूल मुकद्दस में नमाज़ पढ़ी और दुसरी बार बैतुल मामूर में सब अंबिया व मुरसलीन अलैहिस्सलाम और तमाम उम्मते मरहूमा ने नमाज़ पढ़ी।*
(मलफ़ूज़ात 4/17/मदारिज़ नबुव्वत 1/295)
सवाल- हुज़ूर नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम कितनी बार दिदारे इलाही से मुशर्रफ व मुमताज़ हुए?
*जवाब- तर्जुमानुल कुरआन हज़रत इब्ने अब्बास रज़ियल्लाहु तआला अन्हु फरमाते है कि अल्लाह तआला ने हुज़ूर नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम को दो बार अपने दिदार से इम्तियाज़ बख़्शा और दुसरी रिवायत में है कि शबे मैराज को हुज़ूर नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम को दस बार दिदारे इलाही से मुशर्रफ फ़रमाए गए पहली बार मुलाकात के तल्लुक से उसके बाद जब आप नौ बार नमाज़े कम कराने गए।*
(ख़ज़ाइनुल इरफान 27सुरए नमज/मदारिज़ नबुव्वत 1/135/हाशिया जलालैन 229/21)
सवाल- हुज़ूर नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने हज़रत जिब्राईल अलैहिस्सलाम को उनकी असली शक़्ल व सुरत में कितनी बार देखा और कब कब?
*जवाब- किसी नबी ने हज़रत जिब्राईल अलैहिस्सलाम को उनकी असली शक़्ल व सुरत में नहीं देखा सिर्फ हुज़ूर नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने हज़रत जिब्राईल अलैहिस्सलाम को उनकी असली शक़्ल व सुरत में देखा और ऐसा चार बार वाक़ेअ हुआ{1}गारे हिरा में जब आप हुज़ूर नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने हज़रत जिब्राईल अलैहिस्सलाम से उनकी असली शक़्ल व सुरत देखने की ख़्वाहिश ज़ाहिर की और हज़रत जिब्राईल अलैहिस्सलाम ने अपनी अस्ल शक़्ल दिखाई{2}शबे मैराज को सिदरतुल मुन्तहा पर{3}नुज़ूल वही कि इब्तिदाए ज़माने में मक्का मुकर्रमा मुक़ाम अजयाद पर{4}काबा में हज़रत हम्ज़ा रज़ियल्लाहु तआला अन्हु ने आप सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम से हज़रत जिब्राईल अलैहिस्सलाम को उनकी अस्ल शक़्ल व सुरत में देखने की ख़्वाहिश ज़ाहिर की हुज़ूर नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने पहले तो मना फ़रमाया लेकिन हज़रते हम्ज़ा रज़ियल्लाहु तआला अन्हु के इसरार पर बैठ जाएं फिर कुछ देर बाद हज़रत जिब्राईल अलैहिस्सलाम काबा पर उतरे हुज़ूर नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने अपने चचा हज़रत हम्जा रज़ियल्लाहु तआला अन्हु से फ़रमाया देखिए जिब्राईल"अलैहिस्सलाम"अपनी असली शक़्ल व सुरत में आ गए जब हज़रते हम्ज़ा रज़ियल्लाहु तआला अन्हु ने देखा तो बेहोश हो कर गिर गए।*
(दलाइल नबुव्वत/मदारिज़ नबुव्वत 1/392)
*______________________________________*
*हदीसे पाक में है कि इल्म फैलाने वाले के बराबर कोई आदमी सदक़ा नहीं कर सकता।*
(क़ुर्बे मुस्तफा,सफ़्हा100)
*______________________________________*
*______________________________________*
《[इस्लामी हैरत अंगेज़ मालूमात पोस्ट(63)]》
*______________________________________*
*《हुज़ूर नबी-ए-करीमﷺका बयान》*
*《पोस्ट (10)》*
*______________________________________*
सवाल- हुज़ूर नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने कितनी बार तमामा अंबिया किराम व मुरसलीन अलैहिस्सलाम की इमामत फरमाई और कहां कहां?
*जवाब- आला हज़रत फ़ाजिले बरेलवी रहमतुल्लाह तआला अलैह फ़रमाते हैं अव्वलीन व आख़िरीन अंबिया व मुरसलीन अलैहिस्सलाम ने एक बार हुज़ूर नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम की इक़्तिदा में शबे मैराज को बैतूल मुकद्दस में नमाज़ पढ़ी और दुसरी बार बैतुल मामूर में सब अंबिया व मुरसलीन अलैहिस्सलाम और तमाम उम्मते मरहूमा ने नमाज़ पढ़ी।*
(मलफ़ूज़ात 4/17/मदारिज़ नबुव्वत 1/295)
सवाल- हुज़ूर नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम कितनी बार दिदारे इलाही से मुशर्रफ व मुमताज़ हुए?
*जवाब- तर्जुमानुल कुरआन हज़रत इब्ने अब्बास रज़ियल्लाहु तआला अन्हु फरमाते है कि अल्लाह तआला ने हुज़ूर नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम को दो बार अपने दिदार से इम्तियाज़ बख़्शा और दुसरी रिवायत में है कि शबे मैराज को हुज़ूर नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम को दस बार दिदारे इलाही से मुशर्रफ फ़रमाए गए पहली बार मुलाकात के तल्लुक से उसके बाद जब आप नौ बार नमाज़े कम कराने गए।*
(ख़ज़ाइनुल इरफान 27सुरए नमज/मदारिज़ नबुव्वत 1/135/हाशिया जलालैन 229/21)
सवाल- हुज़ूर नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने हज़रत जिब्राईल अलैहिस्सलाम को उनकी असली शक़्ल व सुरत में कितनी बार देखा और कब कब?
*जवाब- किसी नबी ने हज़रत जिब्राईल अलैहिस्सलाम को उनकी असली शक़्ल व सुरत में नहीं देखा सिर्फ हुज़ूर नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने हज़रत जिब्राईल अलैहिस्सलाम को उनकी असली शक़्ल व सुरत में देखा और ऐसा चार बार वाक़ेअ हुआ{1}गारे हिरा में जब आप हुज़ूर नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने हज़रत जिब्राईल अलैहिस्सलाम से उनकी असली शक़्ल व सुरत देखने की ख़्वाहिश ज़ाहिर की और हज़रत जिब्राईल अलैहिस्सलाम ने अपनी अस्ल शक़्ल दिखाई{2}शबे मैराज को सिदरतुल मुन्तहा पर{3}नुज़ूल वही कि इब्तिदाए ज़माने में मक्का मुकर्रमा मुक़ाम अजयाद पर{4}काबा में हज़रत हम्ज़ा रज़ियल्लाहु तआला अन्हु ने आप सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम से हज़रत जिब्राईल अलैहिस्सलाम को उनकी अस्ल शक़्ल व सुरत में देखने की ख़्वाहिश ज़ाहिर की हुज़ूर नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने पहले तो मना फ़रमाया लेकिन हज़रते हम्ज़ा रज़ियल्लाहु तआला अन्हु के इसरार पर बैठ जाएं फिर कुछ देर बाद हज़रत जिब्राईल अलैहिस्सलाम काबा पर उतरे हुज़ूर नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने अपने चचा हज़रत हम्जा रज़ियल्लाहु तआला अन्हु से फ़रमाया देखिए जिब्राईल"अलैहिस्सलाम"अपनी असली शक़्ल व सुरत में आ गए जब हज़रते हम्ज़ा रज़ियल्लाहु तआला अन्हु ने देखा तो बेहोश हो कर गिर गए।*
(दलाइल नबुव्वत/मदारिज़ नबुव्वत 1/392)
*______________________________________*
*हदीसे पाक में है कि इल्म फैलाने वाले के बराबर कोई आदमी सदक़ा नहीं कर सकता।*
(क़ुर्बे मुस्तफा,सफ़्हा100)
*______________________________________*
No comments:
Post a Comment