*【POST 07】नमाज़े जनाजा के बाद उसी वुज़ू से दूसरी नमाज पढ़ना कैसा है?*

*कुछ जगहो पर लोग समझते है। कि जिस वुज़ू से नमाज जनाजा पढ़ी हो उससे दूसरी नमाज नही पढ़ी जा सकती  हालाकि यह गलत और बे अस्ल बात है। बल्कि इसी वुज़ू से फर्ज हो या सुन्नत व नफ्ल हर नमाज पढ़ना ठीक है।*

    ऐसी ही मसले है। जिसको हर मुसलमान का जानना जरूरी है। जिस की बजह से होने बाली गलतियो से बचते रहना बहुत जरूरी है। आज के दौर मे हर कोई अपने आपको बहतर समझने की सोचता है। लेकिन अशल बात से महरूम रह जाता है। अल्लाह और अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहो तआला अलह वसल्लम और नाएबे रसूल यानी हमारे उल्माऔ से बहतर हमारी इस्लाह कोई जाहिल या आम इन्सान नही कर सकता है। कुछ जाहिलो की बात मे आकर हमारे भोले भाले मुसलमान सही व गलत का फर्क नही समझ पाते है। और गलतियो पे गलतियाँ करते चले जाते है। जिसका नुकसान उनहे अपने घर से देना पड़ता है। लेकिन समझ नही पाते है। के यह सब तकलीफ हमे किस बजह से मिल रही है। अल्लाह तआला से दुआ है। हमे अशल मायनो मे सही गलत का फर्क करने की तौफीक अता फरमाए और मसलके आला हजरत पर रहने की तोफीक अता फरमाऐ।
*आमीन सुम्मा आमीन*

📚 *गलत फ़हमियाँ और उनकी इस्लाह सफहा,19*

No comments:

Post a Comment

Our Social Sites