मय्यत को गुस्ल देने के बाद गुस्ल करना अच्छा है लेकिन जरूरी नही कि जिस ने मय्यत को गुस्ल दिया हो वह बाद मे खुद गुस्ल करे इसको जरूरी ख्याल करना या समझना गलत है।
*आम तौर पर कई जगह खास कर छोटे कस्बो मे देखा गया है। जहा इल्म की कमी होने की बजह से लोग गुमराही का रास्ता पकड़ लेते है। और कहते है। किसी रस्म रिवाज का इस्लाम मे मना होने के बाद भी वह लोग उसे ब खूबी मनाते है। अगर उनको मना किया जाए यह सब गलत है। तो जबाब मे सुनने को मिलता है। हमारे बाप दादाओ ने यह किया तो हम भी करेगे बाप दादाओ की तो जल्दी सुनने को तैयार रहते है। पर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहो तआला अलह वसल्लम के बताए रास्ते को छोड़ देते है। लेकिन जिस रिवाज को मनाते है। उसकी जड़ तक नही जाते है। अगर उस जड़ तक जाएगे तो सही है गलत का फर्क भी पता हो जाएगा इसकी एक बजह यह भी है। उल्माऔ से मस्जिद के इमामो से दूर होना अगर किसी गाँव मे एक मस्जिद है। और उसमे इमाम साहब नमाज पड़ाते है। वह इमाम साहब उनकी जाहिलयत के चलते उनही मे ढल जाते है। मिसाल के तोर पर एक कहानी बताता हू।*
किसी गाँव मे सादी थी एक बड़े जमीदार के यहा बड़ी जोरो से शादी की तैयारी चल रही थी शादी के दिन नजदीक थे सब लोग अपने अपने काम मे मसगूल थे अब किसी ने कहा हाफिज साहब को फातहा के लिए बुला के लाऔ हाफिज साहब फोरन बुलाने पर अ गये घर मे एक बूढ़ी दादी थी उनको एक कमरे को देखने की जिम्मेदारी दि गई थी देखा होगा आपने भी हम अपने बडो को देखने बाला काम बता देते है। अराम से बेठे रहे। इसी तरह बह दादी अम्मा को एक कमरा तकने के लिए कहा था जिसमे खाने पीने का सामान रखा हुआ था साथ ही साथ दूध और मिठाई भी रखी थी एक बिल्ली परेशान कर रही थी दादी उससे परेशान हो गई इतने मे उनहे भोले भाले हाफिज साहब दिखाई दिए तेज अवाज मे बुलाते हुए हाफिज साहड फातहा बाद मे होगी पहले इस बिल्ली को टुकनिया के नीचे बन्द करदो हाफिज साहब बिचारे बिल्ली को बड़ी मुस्किल से पकड़ा और बन्द किया फिर फातहा दिए और चले गए।
*इसी तरह कुछ महीनो बाद उस घर मे एक और सादी हुई हाफिज साहब को फिर फातहा के लिए बुलाया गया फिर बही दादी अम्मा बहा मोजूद थी और बह बिल्ली भी मोजूद थी दादी अम्मा फिर तेज अवाज मे फातहा बाद मे होगी पहले बिल्ली बंद हाफिज साहब बिल्ली को पकड़े और बंद किए बंद करने के बाद दादी से कहे फातहा कहा से देनी है। दादी अम्मा तब तक खिसकली यानी इन्तकाल हो गया जेसे तेसे शादी तो हो गई अब इसके बाद कुछ ही साल मे उस घर मे फिर से शादी हुई हाफिज साहब को फातहा के लिए बुलाया वेसे ही एक नई दादी अम्मा यानी उस घर की बहु बोली हाफिज साहब फातहा बाद मे होगी पहले बिल्ली बन्द होगी मेरी दादी अम्मा कराती थी अब हाफिज साहब का दिमाग खराब बिल्ली कहा से लाए बडी उलझन मे डाल दिया ।*
*इस कहानी से हमे क्या नसीहत मिली इसका जबाब आप हजरात बताए गे।*
📚 *गलत फ़हमियाँ और उनकी इस्लाह सफहा, 19*
*आम तौर पर कई जगह खास कर छोटे कस्बो मे देखा गया है। जहा इल्म की कमी होने की बजह से लोग गुमराही का रास्ता पकड़ लेते है। और कहते है। किसी रस्म रिवाज का इस्लाम मे मना होने के बाद भी वह लोग उसे ब खूबी मनाते है। अगर उनको मना किया जाए यह सब गलत है। तो जबाब मे सुनने को मिलता है। हमारे बाप दादाओ ने यह किया तो हम भी करेगे बाप दादाओ की तो जल्दी सुनने को तैयार रहते है। पर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहो तआला अलह वसल्लम के बताए रास्ते को छोड़ देते है। लेकिन जिस रिवाज को मनाते है। उसकी जड़ तक नही जाते है। अगर उस जड़ तक जाएगे तो सही है गलत का फर्क भी पता हो जाएगा इसकी एक बजह यह भी है। उल्माऔ से मस्जिद के इमामो से दूर होना अगर किसी गाँव मे एक मस्जिद है। और उसमे इमाम साहब नमाज पड़ाते है। वह इमाम साहब उनकी जाहिलयत के चलते उनही मे ढल जाते है। मिसाल के तोर पर एक कहानी बताता हू।*
किसी गाँव मे सादी थी एक बड़े जमीदार के यहा बड़ी जोरो से शादी की तैयारी चल रही थी शादी के दिन नजदीक थे सब लोग अपने अपने काम मे मसगूल थे अब किसी ने कहा हाफिज साहब को फातहा के लिए बुला के लाऔ हाफिज साहब फोरन बुलाने पर अ गये घर मे एक बूढ़ी दादी थी उनको एक कमरे को देखने की जिम्मेदारी दि गई थी देखा होगा आपने भी हम अपने बडो को देखने बाला काम बता देते है। अराम से बेठे रहे। इसी तरह बह दादी अम्मा को एक कमरा तकने के लिए कहा था जिसमे खाने पीने का सामान रखा हुआ था साथ ही साथ दूध और मिठाई भी रखी थी एक बिल्ली परेशान कर रही थी दादी उससे परेशान हो गई इतने मे उनहे भोले भाले हाफिज साहब दिखाई दिए तेज अवाज मे बुलाते हुए हाफिज साहड फातहा बाद मे होगी पहले इस बिल्ली को टुकनिया के नीचे बन्द करदो हाफिज साहब बिचारे बिल्ली को बड़ी मुस्किल से पकड़ा और बन्द किया फिर फातहा दिए और चले गए।
*इसी तरह कुछ महीनो बाद उस घर मे एक और सादी हुई हाफिज साहब को फिर फातहा के लिए बुलाया गया फिर बही दादी अम्मा बहा मोजूद थी और बह बिल्ली भी मोजूद थी दादी अम्मा फिर तेज अवाज मे फातहा बाद मे होगी पहले बिल्ली बंद हाफिज साहब बिल्ली को पकड़े और बंद किए बंद करने के बाद दादी से कहे फातहा कहा से देनी है। दादी अम्मा तब तक खिसकली यानी इन्तकाल हो गया जेसे तेसे शादी तो हो गई अब इसके बाद कुछ ही साल मे उस घर मे फिर से शादी हुई हाफिज साहब को फातहा के लिए बुलाया वेसे ही एक नई दादी अम्मा यानी उस घर की बहु बोली हाफिज साहब फातहा बाद मे होगी पहले बिल्ली बन्द होगी मेरी दादी अम्मा कराती थी अब हाफिज साहब का दिमाग खराब बिल्ली कहा से लाए बडी उलझन मे डाल दिया ।*
*इस कहानी से हमे क्या नसीहत मिली इसका जबाब आप हजरात बताए गे।*
📚 *गलत फ़हमियाँ और उनकी इस्लाह सफहा, 19*
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