*【POST 09】क्या सतर खुल जाने से वुज़ू टूट जाता है*

_अवाम मे जो मशहूर है कि घुटना और सतर अपना या पराया देखने से वुज़ू जाता रहता है। यह एक बे-अस्ल बात है। घुटनाया रान वगैरा सतर खुलने से वुज़ू नही टूटता। हाँ बग़ैर जरूरत सतर खुला रहना मना है। और दूसरो के सामने सतर खोलना हराम है।_
           
📚 *(बहारे शरीयत,हिस्सा 2,सफा 28)*
     
*आज कल आम तोर पर देखा जाता है। मर्द जब घर पर रहते है। तो बगैर परदा किए अपने घर बालो के सामने बेठे रहते है। या अराम करने लगते है। उनका पूरा बदन दिखाई देता है। घुटनो से ऊपर का हिस्सा दिखाना इस्लाम मे हराम बताया है। लेकिन इस्लाम के बताने के बाद भी हम अमल करते नजर नही आते है। और घर मे हमारी जवान बहन बेटियो के सामने अपना नंगा बदन दिखाते है। यही बो अस्ल बजह है।जिसका सिला हमे  मिलता है। हमारी माँ बहिनो बेटियो से जो आय दिन  बजारो मे अपने आपको बे पर्दा दिखाने मे मसगूल रहती है।*
 
आपको एक मसला बताता चलू इस्लाम मे खत्ना कराना  सुन्नते इब्राहीम अलहिस्सलाम है। जिसको हम आप अदा भी करते है। लेकिन कब कराना बहतर है। जब 4 साल से लेकर 7 या 8 साल तक बहतर तरीका यही है। लेकिन बच्चे को तकलीफ का अहसास उसके होस रहते न हो तो उसकी खत्ना माँ बाप 1 या 2 साल की उम्र मे करा देते है  बहर हाल यह भी सही है। लेकिन जब बच्चा बालिग हो जाता है। और इस सुन्नत से महरूम रहता है। तो उसकी खत्ना कोई दूसरा मर्द नही कर सकता है। क्यूँ कि किसी दूसरे मर्द को अपनी सतल दिखाना इस्लाम मे नजायज व हराम है।

*इस हाल मे उस बच्चे को या तो अपने हाथ से खत्ना करनी होगी या उसकी शादी होने के बाद उसकी बीबी उसकी खत्ना कर सकती है। या फिर यू कहले किसी गेर मुस्लिम ने कलमा पढ़कर इस्लाम कुबूल किया अब उसकी खत्ना नही है। तो क्या वह मुसलमान नही कहलाए गा या उसकी नमाज रोजे कबूल नही होगे अल्लाह नमाज रोजे कूबूल होगे या नही बह बहतर जानने बाला है। लेकिन इस्लाम के मुताबिक उसकी नमाज भी जायज है। और रोजे भी क्यूँ कि खत्ना कराना सुन्नत है। और नमाज रोजा इस्लाम मे फर्ज है। हा अगर वो चाहे है। तो अपने हाथ से अपनी खतना कर सकता है। या बह शादी सुदा है। तो अपनी बीबी से करवा सकता है। अगर कोई परेशानी न हो तो कराना भी जरूरी है।*

अब सोचने बाली बात यह है। इस्लाम मे खत्ना  कराना मुसलमान का अहिम हिस्सा है। लेकिन बालिग होने के बाद इसपे भी पबन्दी लगाई है। किसी दूसरे को अपनी सतर दिखाना हराम है। और बगैर जरूरत खुद देखना भी सही नही है। इसलिए आप तमामी हजरात इस गुनाह से बचे और अपने घरवालो को भी बचाए अपनी माँ बहनो बेटियो को परदे मे रहने की नसीहत दे जिसकी बजह से हम सर उठाकर दचल सके।

*अल्लाह रब्बुल इज्जत अपने हबीब सल्लल्लाहो तआला अलह वसल्लम के सदके मे हमे इस्लाम का सही मायनो मे पाबन्द बनाए*
आमीन सुम्मा आमीन

📚 *गलत फ़हमियाँ और उनकी इस्लाह सफहा, 19*

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