*कुछ लोग समझते है। कि दूध पीते बच्चो का पेशाब पाक है। हालांकि ऐसा नही। इन्सान का पेशाब मुतलकन नापाक है। चाहे वह दूध पीते बच्चो का हो या बड़ो का.*
📚 *(फतावा रजविया जिल्द 2 सफहा 146)*
आज कल आम तौर पर देखा जाता है। हम सुन्नी सहीउल अकीदा मुसलमान ज्यातर नापाक रहते है। इतना ही नही बलके खड़े होकर ही पेशाब करते नजर आते है। खड़े होकर पेशाब करने से जो पेरो पर छींटे आते है। बह छींटे जहन्नम मे जाने का रास्ता बनाते है। जिससे हम बचते नही है। नबी करीम सल्लल्लाहो तआला अलह वसल्लम ने इरसाद फरमाये पेशाब के छींटो से बचो उची जगह बेठकर पेशाब किया करो क्यो कि यह गैर मुस्लिम का तरीका है। और जो छींटे हमारे पेरो पर आते है। उन छींटो की बजह से हमे तरह तरह की बीमारिया होती है। बह बीमारी जल्द ठीक भी नही होती है।
*दूसरी बात हम एसा करने से नापाक ही रहेगे अल्लाह न करे हमे इसी हालत मे मौत आ जाए। अब बताए क्या ऐसा किसी मुसलमान को गवारा होगा उसकी मौत नापाकी की हालत मे हुई है। उस इन्सान को अल्लाह भी न पसन्द करता है। जो हमेशा नापाक रहता है। और खड़े खड़े पैशाब करता है। मुसलमान नाम रख लेने से हम मुसलमान नही होगे हमे अपने मुसलमान होने की असल जिन्दगी को पहचान ना होगा तभी हम इस दुनिया मे और बाद मरने के कामयाब होगे।*
अगर हम मुसलमान पाक रहने की 24 घंटे आदत बना तो इसका फायदा भी हमे होगा हमेशा अगर पाक रहेगे तो अल्लाह के घर से जो हय्याअलशसलाह की आवाज आती है। एक दिन हमे हमारी पाकी की बजह से मस्जिद तक जरूर खीचके ले जाएगी इन्शा अल्लाह। हर मेरे मोमिन भाई से मेरी गुजारिश है। साफ रहे पाक रहे और अपने रब को अपनी पाकी से राजी करे क्यूकि हर मोमिन मुसलमान की सबसे बड़ी ताकत उसकी पाकी है।
📚 *गलत फ़हमियाँ और उनकी इस्लाह सफहा, 20*
📚 *(फतावा रजविया जिल्द 2 सफहा 146)*
आज कल आम तौर पर देखा जाता है। हम सुन्नी सहीउल अकीदा मुसलमान ज्यातर नापाक रहते है। इतना ही नही बलके खड़े होकर ही पेशाब करते नजर आते है। खड़े होकर पेशाब करने से जो पेरो पर छींटे आते है। बह छींटे जहन्नम मे जाने का रास्ता बनाते है। जिससे हम बचते नही है। नबी करीम सल्लल्लाहो तआला अलह वसल्लम ने इरसाद फरमाये पेशाब के छींटो से बचो उची जगह बेठकर पेशाब किया करो क्यो कि यह गैर मुस्लिम का तरीका है। और जो छींटे हमारे पेरो पर आते है। उन छींटो की बजह से हमे तरह तरह की बीमारिया होती है। बह बीमारी जल्द ठीक भी नही होती है।
*दूसरी बात हम एसा करने से नापाक ही रहेगे अल्लाह न करे हमे इसी हालत मे मौत आ जाए। अब बताए क्या ऐसा किसी मुसलमान को गवारा होगा उसकी मौत नापाकी की हालत मे हुई है। उस इन्सान को अल्लाह भी न पसन्द करता है। जो हमेशा नापाक रहता है। और खड़े खड़े पैशाब करता है। मुसलमान नाम रख लेने से हम मुसलमान नही होगे हमे अपने मुसलमान होने की असल जिन्दगी को पहचान ना होगा तभी हम इस दुनिया मे और बाद मरने के कामयाब होगे।*
अगर हम मुसलमान पाक रहने की 24 घंटे आदत बना तो इसका फायदा भी हमे होगा हमेशा अगर पाक रहेगे तो अल्लाह के घर से जो हय्याअलशसलाह की आवाज आती है। एक दिन हमे हमारी पाकी की बजह से मस्जिद तक जरूर खीचके ले जाएगी इन्शा अल्लाह। हर मेरे मोमिन भाई से मेरी गुजारिश है। साफ रहे पाक रहे और अपने रब को अपनी पाकी से राजी करे क्यूकि हर मोमिन मुसलमान की सबसे बड़ी ताकत उसकी पाकी है।
📚 *गलत फ़हमियाँ और उनकी इस्लाह सफहा, 20*
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