*जो परिन्दे ऊँचे नही उड़ते जमीन पर रहते हैं जैसे मुर्गी और बतख उनकी बीट या पाखाना इन्सान के पाखाने और पेशाब की तरह नजासते गलीजा यानी सख्त किस्म की नापाकी है। और जो परिन्दे ऊपर उड़ते हैं उनमे जो हलाल हैं उनकी बीट पाक है जैसे कबूतर फाख्ता मुर्गाबी मैना घरेलू चिड़िया गुलगुचिया वगैरा। जो परिन्दे हराम है। जैसे कौआ चील शिकरा बाज उनकी बीट खफीफा यानी (हल्की नापाकी) है। उसका वही हुक्म है जो हलाल जानवरो के पेशाब का है*
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हमे इस बात से यह समझना बहूत अहिम है। के हम थोड़ी सी नजासत लगने से कहने लगते है। कपड़े नपाक है नमाज नही पड पाएगे ऐसा कहना भी मुतलन गलत है। और गुनाह भी है हम आम तौर पर देखते है। हमने या हमसे किसी ने नमाज के लिए कहा तो हम साफ जबाब देते है। हम नही जा पाएगे तुम पड़ आऔ ऐसा कहना गुनाह है। शक्त मना है। हा अगर आपका इरादा नही है नमाज मे जाने का तो सामने बाले से ऐसा मत बोलो बल्की इस तरह से कह दो जिससे गुनाह भी न हो और सामने बाला आपके जबाब से मुतमइन हो जाए
*जेसे किसी ने हमसे नमाज को कहा तो उससे कहिए आप चले हम आते है। इन्शा अल्लाह अगर आपने इन्शा अल्लाह लगा दिया तो इतने समझदार आप भी इन्शा अल्लाह का मायना क्या होता है। लेकिन आपको यह बात बता दी तो इसका मतलब यह नही है। के अब ऐसा ही करा करेगे और गुनाह से भी बचेगे तो ऐसा सोचना भी गलत है। नमाज हर सूरत मे पड़ना ही पड़ेगी नमाज किसी भी सूरत मे माफ नही है। अल्लाह से मेरी दुआ है। हर मेरे मुसलमान भाई को सच्चा पक्का पंच वक्ता नमाजी बनाए और अपने रब को राजी करने की तोफीक अता फरमाए।*
📚 *गलत फ़हमियाँ और उनकी इस्लाह सफहा, 22*
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हमे इस बात से यह समझना बहूत अहिम है। के हम थोड़ी सी नजासत लगने से कहने लगते है। कपड़े नपाक है नमाज नही पड पाएगे ऐसा कहना भी मुतलन गलत है। और गुनाह भी है हम आम तौर पर देखते है। हमने या हमसे किसी ने नमाज के लिए कहा तो हम साफ जबाब देते है। हम नही जा पाएगे तुम पड़ आऔ ऐसा कहना गुनाह है। शक्त मना है। हा अगर आपका इरादा नही है नमाज मे जाने का तो सामने बाले से ऐसा मत बोलो बल्की इस तरह से कह दो जिससे गुनाह भी न हो और सामने बाला आपके जबाब से मुतमइन हो जाए
*जेसे किसी ने हमसे नमाज को कहा तो उससे कहिए आप चले हम आते है। इन्शा अल्लाह अगर आपने इन्शा अल्लाह लगा दिया तो इतने समझदार आप भी इन्शा अल्लाह का मायना क्या होता है। लेकिन आपको यह बात बता दी तो इसका मतलब यह नही है। के अब ऐसा ही करा करेगे और गुनाह से भी बचेगे तो ऐसा सोचना भी गलत है। नमाज हर सूरत मे पड़ना ही पड़ेगी नमाज किसी भी सूरत मे माफ नही है। अल्लाह से मेरी दुआ है। हर मेरे मुसलमान भाई को सच्चा पक्का पंच वक्ता नमाजी बनाए और अपने रब को राजी करने की तोफीक अता फरमाए।*
📚 *गलत फ़हमियाँ और उनकी इस्लाह सफहा, 22*
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