*_कुछ लोग जिन पर मालदार साहिबे निसाब होने की बिना पर कुर्बानी वाजिब होती है वह कुर्बानी में ब-वक़्ते ज़िबह अपने नाम के बजाए अपने माँ, बाप या बुज़ुर्गाने दीन का नाम लेकर उनकी तरफ़ से कुर्बानी करते हैं हालांकि यह गलत है। जिस पर कुर्बानी वाजिब है वह पहले अपने नाम से करे। उसके बाद अगर मौक़ा है तो बड़े जानवर में और हिस्से लेकर या दूसरे जानवर बुज़ुर्गाने दीन या अपने ज़िन्दा या मुर्दा माँ बाप की तरफ से ज़िबह करे और हुज़ूर सय्यिदे आलम अहमद मुजतबा मुहम्मद मुस्तफ़ा सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम के नाम से कुर्बानी करना बड़ी फज़ीलत है लेकिन जब उस पर खुद कुर्बानी वाजिब है तो यह फज़ीलतें उसी के लिए हैं जो खुद अपनी तरफ़ से पहले करे वरना कुर्बानी न करने का गुनाह होगा।_*
📚 *गलत फ़हमियाँ और उनकी इस्लाह सफहा,140*
📚 *गलत फ़हमियाँ और उनकी इस्लाह सफहा,140*
No comments:
Post a Comment