आज कल मस्जिदों में सबाल करने और भीख मांगने का रिवाज बहुत बढ़ता जा रहा है। अमूमन देखा जाता है कि इधर इमाम साहब ने सलाम फेरा उधर किसी न किसी ने और बाज़ औकात कई-कई लोगों ने अपनी अपनी आपबीती सुनाना और मदद करो भाईयो कि पुकार लगाना चालू कर दिया हालांकि यह निहायत गलत तरीका है। ऐसे लोगो को इस हरकत से बाज़ रखा जाए और मस्जिदों मे भीख मांगने को सख्ती से रोका जाए।
*सदरूश्शरीआं हजरत मौलाना अमजद अली साहब अलैहिर्रहमह फरमाते है।*
"मस्जिद मे सबाल करना हराम है। और उस साइल को देना भी मना है।
📗 *(बहारे शरीअत हिस्सा 3 सफहा 184)*
*इसका तरीका यह होना चाहिए कि ऐसे लोग या तो बाहर दरवाज़े पर सबाल करे या इमामे मस्जिद वगैरह किसी से कह दे कि वह उनकी जरूरत से लोगो को आगाह करदें।*
📚 *गलत फ़हमियाँ और उनकी इस्लाह सफहा, 35*
यह हकीकत है। जो हर मस्जिदों मे आम तौर पर देखने को मिलती है। और मस्जिद के जिम्मेदार लोग इनको मना भी नबी करते है। मदद करो मदद करना अच्छा और नेक काम है। पर अल्लाह के घर मे अल्लाह से मांगो जो मालिके कुन है। कोई इन्सान या आम आमदी किसी की चाहते हुए भी परेशानी को दूर नही कर सकता इसका इख्तियार केवल अल्लाह रब्बुल इज्जत के हाथ मे तो क्यूँ न हम अपनी परेशानी अल्लाह से रोकर करे क्यूँ न हम अल्लाह के प्यारे महबूब सल्लल्लाहो तआला अलह वसल्लम के सदके मे मागे जिनके सदके मे अल्लाह ने हमे पैदा किया है। जिनके सदके मे दुनिया को बनाया है। अरे नदान इन्सान अल्लाह रब्बुल इज्जत अपने बन्दो से सत्तर माँऔ के बराबर प्यार करता है। उसकी रहमत से कभी महरूम नही रहता कोई बस शुक्र करना सीख जाऔ इसका अज्र मिलना भी पता हो जाएगा।
*दुआ है। पाक परबर दिगार अल्लाह रब्बुल इज्जत से किसी और के आगे झुखना न शिखाए शिवाए अल्लाह के*
*सदरूश्शरीआं हजरत मौलाना अमजद अली साहब अलैहिर्रहमह फरमाते है।*
"मस्जिद मे सबाल करना हराम है। और उस साइल को देना भी मना है।
📗 *(बहारे शरीअत हिस्सा 3 सफहा 184)*
*इसका तरीका यह होना चाहिए कि ऐसे लोग या तो बाहर दरवाज़े पर सबाल करे या इमामे मस्जिद वगैरह किसी से कह दे कि वह उनकी जरूरत से लोगो को आगाह करदें।*
📚 *गलत फ़हमियाँ और उनकी इस्लाह सफहा, 35*
यह हकीकत है। जो हर मस्जिदों मे आम तौर पर देखने को मिलती है। और मस्जिद के जिम्मेदार लोग इनको मना भी नबी करते है। मदद करो मदद करना अच्छा और नेक काम है। पर अल्लाह के घर मे अल्लाह से मांगो जो मालिके कुन है। कोई इन्सान या आम आमदी किसी की चाहते हुए भी परेशानी को दूर नही कर सकता इसका इख्तियार केवल अल्लाह रब्बुल इज्जत के हाथ मे तो क्यूँ न हम अपनी परेशानी अल्लाह से रोकर करे क्यूँ न हम अल्लाह के प्यारे महबूब सल्लल्लाहो तआला अलह वसल्लम के सदके मे मागे जिनके सदके मे अल्लाह ने हमे पैदा किया है। जिनके सदके मे दुनिया को बनाया है। अरे नदान इन्सान अल्लाह रब्बुल इज्जत अपने बन्दो से सत्तर माँऔ के बराबर प्यार करता है। उसकी रहमत से कभी महरूम नही रहता कोई बस शुक्र करना सीख जाऔ इसका अज्र मिलना भी पता हो जाएगा।
*दुआ है। पाक परबर दिगार अल्लाह रब्बुल इज्जत से किसी और के आगे झुखना न शिखाए शिवाए अल्लाह के*
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