मय्यत के तीजे, दसवें या चालीसवें वगैरहा के मौके पर दावत करके खाना खिलाने का जो रिवाज है यह भी महज़ ग़लत है। और ख़िलाफ़ शरअ है। हाँ ग़रीबों और फ़क़ीरों को बुला कर खिलाने में हरज नहीं। *आलाहज़रत* फ़रमाते हैं मुर्दे का खाना सिर्फ फ़क़ीरों के लिए है आम दावत के तौर पर जो करते हैं यह मना है, ग़नी न खाए।
📘 *(अहकामे शरीअत हिस्सा दोम, सफहा 16)*
और फरमाते हैं मौत में दावत बे मअना है, फ़तहुल कदीर में इसे बिदअते मुसतकुबहा फ़रमाया।
📙 *(फ़तावा रजविया, जिल्द 4, सफ़हा 221)*
📚 *गलत फ़हमियाँ और उनकी इस्लाह सफहा, 54*
📍 *Note :- आज कल देखा जाता है अगर किसी के यहा कोई मर जाता है। तो इस तरह से 10वा 20वा 40वा कराते है। जेसे कोई शादी का फन्शन करा रहे हो अगर कोई गरीब इन्शान अपनी गरीबी की खातिर न करा सके तो उस पर पडोशी और आवाम के लोग तंज कसते है। और कई किस्म की बाते भी सुनाते है। यह तरीका सरासर गलत है। जब शरीअत ने इस खाने से गनी को रोक रखा है तो क्यूँ हम यह रस्म शादी की तरह करते है। गलती हमारी है हमे ही इन सब का बायकाट करना चाहिए और आगे आकर आवाम को आगाह करना चाहिएं अगर आपको अपने घर बालो के लिए इसाले सबाब के लिए इतना ख़र्च करना ही है तो किसी गरीब लड़की का घर बसाने मे करो कसम खुदा की यह काम आपका दुनिया व आखरत दोनो शवार देगा। मेरे प्यारे भाईयो अगर आप मेरी बात से सहमत है। तो आज से ही अपने जहिन को बदले और *अल्लाह तआला और उसके रसूल सल्लल्लाहो तआला अलह वसल्लम की रज़ा पर अमल जरूर करे।*
📘 *(अहकामे शरीअत हिस्सा दोम, सफहा 16)*
और फरमाते हैं मौत में दावत बे मअना है, फ़तहुल कदीर में इसे बिदअते मुसतकुबहा फ़रमाया।
📙 *(फ़तावा रजविया, जिल्द 4, सफ़हा 221)*
📚 *गलत फ़हमियाँ और उनकी इस्लाह सफहा, 54*
📍 *Note :- आज कल देखा जाता है अगर किसी के यहा कोई मर जाता है। तो इस तरह से 10वा 20वा 40वा कराते है। जेसे कोई शादी का फन्शन करा रहे हो अगर कोई गरीब इन्शान अपनी गरीबी की खातिर न करा सके तो उस पर पडोशी और आवाम के लोग तंज कसते है। और कई किस्म की बाते भी सुनाते है। यह तरीका सरासर गलत है। जब शरीअत ने इस खाने से गनी को रोक रखा है तो क्यूँ हम यह रस्म शादी की तरह करते है। गलती हमारी है हमे ही इन सब का बायकाट करना चाहिए और आगे आकर आवाम को आगाह करना चाहिएं अगर आपको अपने घर बालो के लिए इसाले सबाब के लिए इतना ख़र्च करना ही है तो किसी गरीब लड़की का घर बसाने मे करो कसम खुदा की यह काम आपका दुनिया व आखरत दोनो शवार देगा। मेरे प्यारे भाईयो अगर आप मेरी बात से सहमत है। तो आज से ही अपने जहिन को बदले और *अल्लाह तआला और उसके रसूल सल्लल्लाहो तआला अलह वसल्लम की रज़ा पर अमल जरूर करे।*
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