*इन्जेक्शन चाहे गोश्त मे लगवाया जाये या रग मे इससे रोज़ा नही टूटता है। अलबत्ता उलेमाए किराम ने रोज़े मे इन्जेक्शन लगवाने को मकरूह फ़रमाता।*
लिहाज़ा जब तक खास ज़रूरत न हो न लगवायें इस मसअले की तफ़सील व तहक़ीक जानने के लिए देखिऐ :-
📗 *(फ़तावा फ़ैजुर्रसूल जिल्द 1 सफ़ा 517)*
📘 *(फ़तावा मरकज़ी दारूल इफ्ता सफ़ा 359)*
📚 *गलत फ़हमियाँ और उनकी इस्लाह सफहा, 71*
_आम तोर पर देखा जाता है। एक तो हमारे भाई रोजे से नही रहते अगर रहते भी है। तो जेसे बो किसी पर अहसान करते हो ऐसे ज़ोरदारों का रोज़ा उनके मुँह पर मार दिया जाएगा जो रोजे की हालत मे अपने किसी भाई को तकलीफ पहुँचाए या उसके साथ बुरा बरताव करे अए मेरे रोजेदार भाईयों रोजा तो सब्र का नाम है। रोज़ा अल्लाह की इबादत का नाम है। जो हम जेसे गुनहगारो को *अल्लाह ने अपने हबीब सल्लल्लाहो तआला अलह वसल्लम* के सदके मे हमे अता किए है।_
_हमारे कुछ भाई रोजे से तो रहते है। पर रोज़े की हालत मे गलत कामो मे मसगूल रहते है। चोराहो पर आकर बद्निगाही करते है। अपने मुँह से कहते है। अगर हमारा रोजा न होता तो हम फलां काम ऐसा कर देते बेसा कर देते जो अपने रोज़े की सरे आम नुमाइस करे उनका रोज़ा उनके मुँह पर मार दिया जाएगा नेक अमाल तो ऐसे है। जो अल्लाह और उसका करने बाला बन्दा बहतर जाने उसको कहते नेक काम करना रियाकारी करके तुम्हारा कोई नेक अमाल अल्लाह की बारगाह मे कुबूल न होंगा अए रोजेदारों अगर आख रत सुधारनी है। तो सच्चे दिल से अल्लाह की बारगाह मे ऱूज़ू करना सीख जाओ मे दावे के साथ कहता हू। अगर तुम्हारे किसी नेक काम मे दिखावा न होगा तो दुनिया भी सबर जाएगी आखिरत भी सबर जाएगी।_
*दुआ है पाक परबरदिगार से हम सब मुसलमानो को सही मायनो मे नमाज़ रोज़े का पाबंद बना दे इस माहे मुबारक का सदका अता फरमाऐ*
*आमीन सुम्मा आमीन या रब्बुल आलमीन*
लिहाज़ा जब तक खास ज़रूरत न हो न लगवायें इस मसअले की तफ़सील व तहक़ीक जानने के लिए देखिऐ :-
📗 *(फ़तावा फ़ैजुर्रसूल जिल्द 1 सफ़ा 517)*
📘 *(फ़तावा मरकज़ी दारूल इफ्ता सफ़ा 359)*
📚 *गलत फ़हमियाँ और उनकी इस्लाह सफहा, 71*
_आम तोर पर देखा जाता है। एक तो हमारे भाई रोजे से नही रहते अगर रहते भी है। तो जेसे बो किसी पर अहसान करते हो ऐसे ज़ोरदारों का रोज़ा उनके मुँह पर मार दिया जाएगा जो रोजे की हालत मे अपने किसी भाई को तकलीफ पहुँचाए या उसके साथ बुरा बरताव करे अए मेरे रोजेदार भाईयों रोजा तो सब्र का नाम है। रोज़ा अल्लाह की इबादत का नाम है। जो हम जेसे गुनहगारो को *अल्लाह ने अपने हबीब सल्लल्लाहो तआला अलह वसल्लम* के सदके मे हमे अता किए है।_
_हमारे कुछ भाई रोजे से तो रहते है। पर रोज़े की हालत मे गलत कामो मे मसगूल रहते है। चोराहो पर आकर बद्निगाही करते है। अपने मुँह से कहते है। अगर हमारा रोजा न होता तो हम फलां काम ऐसा कर देते बेसा कर देते जो अपने रोज़े की सरे आम नुमाइस करे उनका रोज़ा उनके मुँह पर मार दिया जाएगा नेक अमाल तो ऐसे है। जो अल्लाह और उसका करने बाला बन्दा बहतर जाने उसको कहते नेक काम करना रियाकारी करके तुम्हारा कोई नेक अमाल अल्लाह की बारगाह मे कुबूल न होंगा अए रोजेदारों अगर आख रत सुधारनी है। तो सच्चे दिल से अल्लाह की बारगाह मे ऱूज़ू करना सीख जाओ मे दावे के साथ कहता हू। अगर तुम्हारे किसी नेक काम मे दिखावा न होगा तो दुनिया भी सबर जाएगी आखिरत भी सबर जाएगी।_
*दुआ है पाक परबरदिगार से हम सब मुसलमानो को सही मायनो मे नमाज़ रोज़े का पाबंद बना दे इस माहे मुबारक का सदका अता फरमाऐ*
*आमीन सुम्मा आमीन या रब्बुल आलमीन*
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