_अवाम मे कुछ लोग ऐसा ख़्याल करते है। हालाँकि यह उनकी ग़लतफहमी है। माहे रमज़ान मे इफ़्तार के वक़्त से ख़त्मे शहरी तक रात मे जिस तरह खाना पीना जाइज़ है। उसी तरह बीवी और शौहर का हमबिस्तर होना और सुबहत व मुजामअत बिला शक जाइज़ है। और और बकसरत अहादीस से साबित है। बल्कि कुर्आन शरीफ़ मे ख़ास इसकी इजाज़त के लिए आयते करीमा नाजिल़ फरमाई गई।_
*इरशादे बारी तआला है :-*
_*तर्जमा :-* तुम्हारे लिऐ रोजे की रातों मे औरतो से सुबहत हलाल की गई वो तुम्हारे लिए लिबास हैं तुम उनके लिए लिबास।_
📖 *(पारा 2 रूकूअ 7)*
📚 *गलत फ़हमियाँ और उनकी इस्लाह सफहा, 71*
_खुलाशा यही है। कुछ जाहिलाना लोग इसको गलत समझते है। लेकिन ऐसा कुछ नही अल्लाह ने जेसे आम रातो मे बीवी के साथ सुबहत जाइज़ की है। इसी तरह रमज़ान की रातो मे बिला शक जाइज़ है। ख़्याल रहे रातो मे रोज़े की हालत मे दिन में नहीं खासकर रोज़दार को अपने रोज़े की हिफाजत ख़ुद करनी होती है। वो इसलिए रोज़ेदार का रोज़ा अल्लाह और उसके बन्दे के दरमियांन का होतां जिसको अल्लाह और अल्लाह के बन्दो के शिवा तीसरा कोई नही जानता है। अब जरा सोचो मुसलमानो रोज़दार अपने रब के कितने करीब न होंगा कुर्आन बान जाओ *प्यारे आका सल्लल्लाहो तआला अलह वसल्लम* जिनके सदके मे अल्लाह तआला ने यह महीना हम गुनहगारो को अता किया है। रोज़ा भूख प्यास नमाज़े पढ़ने का नाम नहीं रोज़ा तो वह है। जिससे रखनें के बाद अल्लाह और अल्लाह के *महबूब सल्लल्लाहो तआला अलह वसल्लम* के शिवा कोई दुनियाँवी खराबी मे मसगूल न हो ऐसा रोज़ेदार का रोज़ा बिला शक अल्लाह तआला की बारगाह मे मक़बूल है।_
*कुछ रोज़ेदार रोज़े की हालत मे रहकर इतना थूखते है। जिसकी कोई हद नही है। और दूसरे को अहसास कराते है। हम रोज़े से है। यह ़रिया कारी होंगी ़रिया कारी करने बालो का रोज़ा अल्लाह पसन्द नही करता है। और दूसरी बात अगर बह हद से ज्यादा थूकेगा तो जल्द ही उसे प्यास की सिद्दत महसूश होने लगेगी जिससे रोज़ेदार की हालत कमजोर होतीं है। मे अपने उन भाई बहनो माँ से कहना चाहता हू। थूक को गुटकने से रोज़ा नही जाता है। यह भी गलतफहमी आवाम मे मशहूर है। हा मुँह भरकर थूक को अन्दर निगलने से रोज़ा मकरूह होता है। पर टूटता नही है। मुँह भर के थूक गुटकना आम दिनो मे भी मकरूह है। लेकिन थोड़ा थूक अगर आप अन्दर निगलते है। तो उससे रोज़ा नही जाता है। इस बात का खास ख़्याल रखे।*
*इरशादे बारी तआला है :-*
_*तर्जमा :-* तुम्हारे लिऐ रोजे की रातों मे औरतो से सुबहत हलाल की गई वो तुम्हारे लिए लिबास हैं तुम उनके लिए लिबास।_
📖 *(पारा 2 रूकूअ 7)*
📚 *गलत फ़हमियाँ और उनकी इस्लाह सफहा, 71*
_खुलाशा यही है। कुछ जाहिलाना लोग इसको गलत समझते है। लेकिन ऐसा कुछ नही अल्लाह ने जेसे आम रातो मे बीवी के साथ सुबहत जाइज़ की है। इसी तरह रमज़ान की रातो मे बिला शक जाइज़ है। ख़्याल रहे रातो मे रोज़े की हालत मे दिन में नहीं खासकर रोज़दार को अपने रोज़े की हिफाजत ख़ुद करनी होती है। वो इसलिए रोज़ेदार का रोज़ा अल्लाह और उसके बन्दे के दरमियांन का होतां जिसको अल्लाह और अल्लाह के बन्दो के शिवा तीसरा कोई नही जानता है। अब जरा सोचो मुसलमानो रोज़दार अपने रब के कितने करीब न होंगा कुर्आन बान जाओ *प्यारे आका सल्लल्लाहो तआला अलह वसल्लम* जिनके सदके मे अल्लाह तआला ने यह महीना हम गुनहगारो को अता किया है। रोज़ा भूख प्यास नमाज़े पढ़ने का नाम नहीं रोज़ा तो वह है। जिससे रखनें के बाद अल्लाह और अल्लाह के *महबूब सल्लल्लाहो तआला अलह वसल्लम* के शिवा कोई दुनियाँवी खराबी मे मसगूल न हो ऐसा रोज़ेदार का रोज़ा बिला शक अल्लाह तआला की बारगाह मे मक़बूल है।_
*कुछ रोज़ेदार रोज़े की हालत मे रहकर इतना थूखते है। जिसकी कोई हद नही है। और दूसरे को अहसास कराते है। हम रोज़े से है। यह ़रिया कारी होंगी ़रिया कारी करने बालो का रोज़ा अल्लाह पसन्द नही करता है। और दूसरी बात अगर बह हद से ज्यादा थूकेगा तो जल्द ही उसे प्यास की सिद्दत महसूश होने लगेगी जिससे रोज़ेदार की हालत कमजोर होतीं है। मे अपने उन भाई बहनो माँ से कहना चाहता हू। थूक को गुटकने से रोज़ा नही जाता है। यह भी गलतफहमी आवाम मे मशहूर है। हा मुँह भरकर थूक को अन्दर निगलने से रोज़ा मकरूह होता है। पर टूटता नही है। मुँह भर के थूक गुटकना आम दिनो मे भी मकरूह है। लेकिन थोड़ा थूक अगर आप अन्दर निगलते है। तो उससे रोज़ा नही जाता है। इस बात का खास ख़्याल रखे।*
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