*_कुछ जगहों पर रजब की 17 तारीख़ को रोज़ा रखते है। और उसे रोट बोट का रोज़ा कहते है। ख़ास तौर से इस दिन रोज़ा रखने का शरीअते इस्लामिया मे कोई हुक्म नही नफ़्ल रोज़ा साल मे मननूअ दिनो को छोड़ कर कभी भी रखा जा सकता है।17 रजब को रोज़े के लिए मख़सूस वज़न की छोटी बड़ी दो रोटियाँ और बोटियाँ पकाना छोटी फातिहा पढ़ने वाले को और बड़ी रोज़ेदार को खिलाना बे अस्ल और गढ़ी हुई बातें है।_*
📚 *गलत फ़हमियाँ और उनकी इस्लाह सफहा, 72*
_खुलासा यही है किसी के नाम के रोजे रखना शरीअत मे शक्त मना है। अल्लाह के शिवा किसी पर रोज़ा रखना जायज़ नही है।_
*_माहे रमज़ान का मुबारक महीना शुरू हो गया है। मेरे अजीज भाई माँ बहिनो से गुजारिश है। इस पाक महीने मे जितना हो सके अल्लाह की इबादत मे मसगूल रहो मोबाईल को अपने पास ज्यादा मत रखों यह भी शैतान का काम कर रहा है। कुर्आन की तिलावत करो तसबीह कलिमात पढ़ो अगर इस माह मे अपने रब को राजी नही किया तो फिर न कर पाओगे अए मुसलमानो मना लो करलो राज़ी रब को रोकर रोज़े रखकर नमाज़े पढ़कर अल्लाह हमे सही मायनो इस माह की कद्र करने तोफीक अता फरमाए।_*
*आमीन सुम्मा आमीन या रब्बुल आलमीन*
📚 *गलत फ़हमियाँ और उनकी इस्लाह सफहा, 72*
_खुलासा यही है किसी के नाम के रोजे रखना शरीअत मे शक्त मना है। अल्लाह के शिवा किसी पर रोज़ा रखना जायज़ नही है।_
*_माहे रमज़ान का मुबारक महीना शुरू हो गया है। मेरे अजीज भाई माँ बहिनो से गुजारिश है। इस पाक महीने मे जितना हो सके अल्लाह की इबादत मे मसगूल रहो मोबाईल को अपने पास ज्यादा मत रखों यह भी शैतान का काम कर रहा है। कुर्आन की तिलावत करो तसबीह कलिमात पढ़ो अगर इस माह मे अपने रब को राजी नही किया तो फिर न कर पाओगे अए मुसलमानो मना लो करलो राज़ी रब को रोकर रोज़े रखकर नमाज़े पढ़कर अल्लाह हमे सही मायनो इस माह की कद्र करने तोफीक अता फरमाए।_*
*आमीन सुम्मा आमीन या रब्बुल आलमीन*
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