सवाल- हजरत आदम अलैहिस्सलाम के जिस्म का कौनसा अजू कहाँ की मिट्टी से बनाया गया?
*जवाब- आपके जिस्म का हर अज़ू(हिस्सा)अक़ामीले अरज़ के अलग अलग हिस्से से बनाया गया क्योंकि आपका सर अक़्दस मक्का की मिट्टी से बनाया गया गर्दन अहसर बैतुल मुकद्दस की मिट्टी से सीना महर गंजीना अदन की मिट्टी से शिकम व पुश्त हिंदुस्तान की मिट्टी से दस्ते हक़ परस्त मश्रिक की मिट्टी से और कदम मोहतरम मग़रिब की मिट्टी से बनाए गए बाकी गोश्त व पोस्त रंग व पैर खून व ग़ज़ारीक वगैरह मुख़्तलिफ जगहों की मिट्टीयों से बनाए गए और हजरत अब्दुल्लाह बिन अब्बास रज़ियल्लाहु तआला अन्हु से रिवायत है कि मैने नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम पुछा या रसूलुल्लाह"सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम"अल्लाह तआला ने हजरत आदम अलैहिस्सलाम को किस तरह पैदा फरमाया कि उनके फरजंद एक दूसरे से नही मिलते जुलते फरमाया ऐ अब्दुल्लाह बिन अब्बास हक़ सुब्हानहु आज़म ने आदम अलैहिस्सलाम के रूए रौशन को मक्का मौज़्ज़मा की मिट्टी से बनाया सरे अनवर को बैतुल मुकद्दस की ख़ाक से मुसरगाने दिलिस्तान और चश्मे करम को दुनिया की ख़ाक से क़दम मोहतरम को हिंदुस्तान की ज़मीन से आज़ा को जजीरा सरंदीप की मिट्टी से और कमर को शहद की खाक से और रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने फरमाया कि बस ऐ अब्दुल्लाह अगर आदम"अलैहिस्सलाम"की ख़ाके पाक एक जगह से ली जाती तो आपके फ़रजंदों में से हर एक दूसरे से पहचाना न जाता सब एक ही शक़्ल के होते।*
(मआरिज नबुव्वत जिल्द1सफ़्हा25/मल्फूजात ख़्वाजा निजामुद्दीन औलिया रहमतुल्लाह तआला अलैहि सफ़्हा145)
सवाल- हजरत आदम अलैहिस्सलाम की ख़मीर में खुशी का पानी कितना है और ग़म का पानी कितना है?
*जवाब- आपकी ख़ाक पाक पर चालीस दिनों तक बारिश होती रही चालीस दिनों में से उन्तालिस दिन रंज व ग़म का पानी बरसा और एक दिन खुशी व मुसर्रत का इसलिए बनी आदम को रंज व ग़म ज्यादा होते है और खुशी कम।*
(तफसीर नईमी जिल्द1सफ़्हा285)
*______________________________________*
*हदीसे पाक में है कि इल्म फैलाने वाले के बराबर कोई आदमी सदक़ा नहीं कर सकता।*
(क़ुर्बे मुस्तफा,सफ़्हा100)
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*जवाब- आपके जिस्म का हर अज़ू(हिस्सा)अक़ामीले अरज़ के अलग अलग हिस्से से बनाया गया क्योंकि आपका सर अक़्दस मक्का की मिट्टी से बनाया गया गर्दन अहसर बैतुल मुकद्दस की मिट्टी से सीना महर गंजीना अदन की मिट्टी से शिकम व पुश्त हिंदुस्तान की मिट्टी से दस्ते हक़ परस्त मश्रिक की मिट्टी से और कदम मोहतरम मग़रिब की मिट्टी से बनाए गए बाकी गोश्त व पोस्त रंग व पैर खून व ग़ज़ारीक वगैरह मुख़्तलिफ जगहों की मिट्टीयों से बनाए गए और हजरत अब्दुल्लाह बिन अब्बास रज़ियल्लाहु तआला अन्हु से रिवायत है कि मैने नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम पुछा या रसूलुल्लाह"सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम"अल्लाह तआला ने हजरत आदम अलैहिस्सलाम को किस तरह पैदा फरमाया कि उनके फरजंद एक दूसरे से नही मिलते जुलते फरमाया ऐ अब्दुल्लाह बिन अब्बास हक़ सुब्हानहु आज़म ने आदम अलैहिस्सलाम के रूए रौशन को मक्का मौज़्ज़मा की मिट्टी से बनाया सरे अनवर को बैतुल मुकद्दस की ख़ाक से मुसरगाने दिलिस्तान और चश्मे करम को दुनिया की ख़ाक से क़दम मोहतरम को हिंदुस्तान की ज़मीन से आज़ा को जजीरा सरंदीप की मिट्टी से और कमर को शहद की खाक से और रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने फरमाया कि बस ऐ अब्दुल्लाह अगर आदम"अलैहिस्सलाम"की ख़ाके पाक एक जगह से ली जाती तो आपके फ़रजंदों में से हर एक दूसरे से पहचाना न जाता सब एक ही शक़्ल के होते।*
(मआरिज नबुव्वत जिल्द1सफ़्हा25/मल्फूजात ख़्वाजा निजामुद्दीन औलिया रहमतुल्लाह तआला अलैहि सफ़्हा145)
सवाल- हजरत आदम अलैहिस्सलाम की ख़मीर में खुशी का पानी कितना है और ग़म का पानी कितना है?
*जवाब- आपकी ख़ाक पाक पर चालीस दिनों तक बारिश होती रही चालीस दिनों में से उन्तालिस दिन रंज व ग़म का पानी बरसा और एक दिन खुशी व मुसर्रत का इसलिए बनी आदम को रंज व ग़म ज्यादा होते है और खुशी कम।*
(तफसीर नईमी जिल्द1सफ़्हा285)
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*हदीसे पाक में है कि इल्म फैलाने वाले के बराबर कोई आदमी सदक़ा नहीं कर सकता।*
(क़ुर्बे मुस्तफा,सफ़्हा100)
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