_इस मसअले से काफ़ी लोग ग़ाफ़िल है। और पैर की उंगलियों के सिर्फ़ सिरे जमीन से लग जाने को सज्दा समझते है। और कुछ का तो सिर्फ़ अंगूठे का सिरा ही जमीन से लगता है। और बाकी उंगलियाँ ज़मीन को छूती भी नही इस सूरत मे न सज्दा होता है। न नमाज़ ।_
*_सज्दे मे पैर की उंगलियों के सिर्फ़ सिरे नहीं बल्कि उंगलियों पर जोर दे कर किंब्ले की तरफ़ उंगलियों का पेट जमीन से लगाना चाहिए।_*
📚 *फ़तावा रजविया शरीफ़ जिल्द 1 सफ़हा 556 पर है।*
_सज्दे मे कम अज़ कम एक उँगली का पेट ज़मीन से लगा होना फ़र्ज है। और पाँव की अक्सर उंगलियों का पेट ज़मीन जमा होना वाजिब।._
📚 *गलत फ़हमियाँ और उनकी इस्लाह सफहा, 29*
*ख़ुलासा:- यही है। नमाज़ एक अहिम इबादत है। जिसका करना हर मुसलमान मर्द औरत पर फ़र्ज है। लेकिन हम अपने कामो मे मसरूफ रहने के चक्कर मे इतनी जल्दबाजी से नमाज़ अदा करते है । के सुन्नत तो ठीक फ़र्ज को भी सही तरीके से अदा नही करते है। ऐसे नमाज़ियो के चाहिए नमाज़ अहिस्ता अदा करे यानी जल्दबाजी न करे और नमाज़ मे जितने फ़र्ज है। उनके साथ नमाज़ अदा करे अगर एक भी फ़र्ज छूट गया तो आपकी नमाज़ न हुई। और नमाज़ को फिरसे दोहराना होंगा अगर हम यह सोचे के हमने पीछे इस इमाम के कह दिया तो अब चाहें जेसी पढ़े इमाम जाने तो यह उन लोगों की ग़लतफहमी है।*
_इमाम के आमाल इमाम के साथ होगे और तुम्हारे आमाल तुम्हारे साथ होगे फिर इमाम नही आएगा तुम्हारी मग्फिरत करवाने तुम्हे खुद अपना हिसाब देना होंगा अभी भी वक़्त है। मुसलमानों सभल जाओ और अपनी पहचान को पहचानो औल सच्चे दिल से तौबा करलो और नमाज़ को सही मायनो मे सीखो क्यूँ कि पहला सबाल सिर्फ नमाज़ का ही होंगा अगर नमाज़ सही है। तो फिर आमाल नामा देखा जाएगा। अपने उल्माओ के पास जाकर थोड़ा वक़्त बिताया करों वह तुमसे कुछ मांग ते नही पर वह अपनी बातो से तुम्हारी जिन्दगींयो को जरूर सबारते है। इमामो का अदब करो और उनकी सोहबत मे भी रहा करो।_
*अल्लाह रब्बुल इज्जत हम सब मुसलमानो को सही मायनो मे नमाज़े पंच वक़्ता सही मायनो मे अदा करने की तौफीक अता फरमाए।*
*आमीन सुम्मा आमीन या रब्बुल आलमीन*
*_सज्दे मे पैर की उंगलियों के सिर्फ़ सिरे नहीं बल्कि उंगलियों पर जोर दे कर किंब्ले की तरफ़ उंगलियों का पेट जमीन से लगाना चाहिए।_*
📚 *फ़तावा रजविया शरीफ़ जिल्द 1 सफ़हा 556 पर है।*
_सज्दे मे कम अज़ कम एक उँगली का पेट ज़मीन से लगा होना फ़र्ज है। और पाँव की अक्सर उंगलियों का पेट ज़मीन जमा होना वाजिब।._
📚 *गलत फ़हमियाँ और उनकी इस्लाह सफहा, 29*
*ख़ुलासा:- यही है। नमाज़ एक अहिम इबादत है। जिसका करना हर मुसलमान मर्द औरत पर फ़र्ज है। लेकिन हम अपने कामो मे मसरूफ रहने के चक्कर मे इतनी जल्दबाजी से नमाज़ अदा करते है । के सुन्नत तो ठीक फ़र्ज को भी सही तरीके से अदा नही करते है। ऐसे नमाज़ियो के चाहिए नमाज़ अहिस्ता अदा करे यानी जल्दबाजी न करे और नमाज़ मे जितने फ़र्ज है। उनके साथ नमाज़ अदा करे अगर एक भी फ़र्ज छूट गया तो आपकी नमाज़ न हुई। और नमाज़ को फिरसे दोहराना होंगा अगर हम यह सोचे के हमने पीछे इस इमाम के कह दिया तो अब चाहें जेसी पढ़े इमाम जाने तो यह उन लोगों की ग़लतफहमी है।*
_इमाम के आमाल इमाम के साथ होगे और तुम्हारे आमाल तुम्हारे साथ होगे फिर इमाम नही आएगा तुम्हारी मग्फिरत करवाने तुम्हे खुद अपना हिसाब देना होंगा अभी भी वक़्त है। मुसलमानों सभल जाओ और अपनी पहचान को पहचानो औल सच्चे दिल से तौबा करलो और नमाज़ को सही मायनो मे सीखो क्यूँ कि पहला सबाल सिर्फ नमाज़ का ही होंगा अगर नमाज़ सही है। तो फिर आमाल नामा देखा जाएगा। अपने उल्माओ के पास जाकर थोड़ा वक़्त बिताया करों वह तुमसे कुछ मांग ते नही पर वह अपनी बातो से तुम्हारी जिन्दगींयो को जरूर सबारते है। इमामो का अदब करो और उनकी सोहबत मे भी रहा करो।_
*अल्लाह रब्बुल इज्जत हम सब मुसलमानो को सही मायनो मे नमाज़े पंच वक़्ता सही मायनो मे अदा करने की तौफीक अता फरमाए।*
*आमीन सुम्मा आमीन या रब्बुल आलमीन*
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