*फिक्हे हनफी की तकरीबन सारी किताबों मे यह बात साफ़ लिखी हुई है। कि अज़ान मस्जिद मे न दी जाए। खुद हदीस शरीफ से भी यह साबित है। और किसी हदीस और किसी इस्लामी मीतबर व मुसतनद किताब मे यह नही है। कि कोई अज़ान मस्जिद के अन्दर दि जाए। मगर फिर भी कुछ जगह कुछ लोग जुमे कि दूसरी अज़ान मस्जिद के अन्दर इमाम के सामने खड़े होकर पढ़ते हैं। और सुन्नत पर अमल करने से महरूम रहते है।और महज़ ज़िद और हटधर्मी की बुनियाद पर रसूले ख़ुदा सल्लल्लाहो तआला अलह वसल्लम की प्यारी सुन्नत छोड़ देते है*
और कुछ मक़ामात पर पर तो लाउडस्पीकर मस्जिद के अन्दर रख कर पाँचों वक़्त अज़ान पढ़ते है। इस तरह अजान देने वाले और दिलवाने बाले सब गुनहगार है।
*फतावा आलमगीरी मे है।*
"मस्जिद मे कोई अज़ान न दी जाए"।
📗 *(आलमगीरी बाबुल अज़ान फस्ल 2 सफहा 55)*
📚 *गलत फ़हमियाँ और उनकी इस्लाह सफहा,30 31*
खुलासा यही है। मस्जिद के अन्दर कोई भी अज़ान न दी जाए जो ऐसा करता है। या करवाता है। वह दोनो गुनहगार होगे अल्लाह से दुआ है। कहने सुनने से ज्यादा हम सबको अमल की तौफीक अता फरमाए
*आमीन सुम्मा आमीन या रब्बुल आलमीन*
और कुछ मक़ामात पर पर तो लाउडस्पीकर मस्जिद के अन्दर रख कर पाँचों वक़्त अज़ान पढ़ते है। इस तरह अजान देने वाले और दिलवाने बाले सब गुनहगार है।
*फतावा आलमगीरी मे है।*
"मस्जिद मे कोई अज़ान न दी जाए"।
📗 *(आलमगीरी बाबुल अज़ान फस्ल 2 सफहा 55)*
📚 *गलत फ़हमियाँ और उनकी इस्लाह सफहा,30 31*
खुलासा यही है। मस्जिद के अन्दर कोई भी अज़ान न दी जाए जो ऐसा करता है। या करवाता है। वह दोनो गुनहगार होगे अल्लाह से दुआ है। कहने सुनने से ज्यादा हम सबको अमल की तौफीक अता फरमाए
*आमीन सुम्मा आमीन या रब्बुल आलमीन*
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