आज कल यह जरूरी ख़्याल किया जाता है। कि इकामत या तकबीर जो जमाअत क़ाइम करने से पहले मुअज्जिन लोग पढ़ते है उस मे पढ़ने वाला इमाम के पीछे या दाहिनी ओर हो और बायें जानिब खड़े होकर तकबीर पढ़ने को ममनूअ ख़्याल करते है। हालाकि तकबीर बायी तरफ से पढ़ना भी मना नही है।
*सय्यिदी आला हजरत फरमाते है।*
*"और इकामत की निसबत भी तअय्युने जेहत कि दाहिनी तरफ हो या बाई तरफ़ फ़कीर की नजर से न गुजरी-------- हाँ इस कदर कह सकते हैं। कि मुहाजात इमाम फिर जानिबे रास्त मुनासिब तर है।*
📗 *(फतावा रजविया जिल्द 2 सफहा 465)*
खुलासा यह कि इमाम के पीछे या दाहिनी तरफ़ से पढ़ना ज्यादा बहतर है। लेकिन बाई तरफ़ से पढ़ना भी जाइज़ है। और इससे नमाज मे कोई कमी नही आती और दाहिनी तरफ़ को जरूरी ख़्याल करना गलतफहमी है।
📚 *गलत फ़हमियाँ और उनकी इस्लाह सफहा, 31*
📍 *नोट :- आप हजरात के पास अभी तक जितनी भी पोस्ट पेश कि गई है। सब पोस्टो मे तकरीबन नमाज* से जुड़ी हुई है। आप तमामी हजरात से मेरी मोअदबाना गुजारिस है। नमाज किसी भी हाल मे माफ नही है। नमाज पढ़ो नमाज पढ़ो इससे पहले हमारी नमाज़ पढ़ी जाए अल्लाह हम सबको कहने सुनने से ज्यादा अमल की तौफीक अता फरमाए
*आमीन सुम्मा आमीन या रब्बुल आलमीन*
*सय्यिदी आला हजरत फरमाते है।*
*"और इकामत की निसबत भी तअय्युने जेहत कि दाहिनी तरफ हो या बाई तरफ़ फ़कीर की नजर से न गुजरी-------- हाँ इस कदर कह सकते हैं। कि मुहाजात इमाम फिर जानिबे रास्त मुनासिब तर है।*
📗 *(फतावा रजविया जिल्द 2 सफहा 465)*
खुलासा यह कि इमाम के पीछे या दाहिनी तरफ़ से पढ़ना ज्यादा बहतर है। लेकिन बाई तरफ़ से पढ़ना भी जाइज़ है। और इससे नमाज मे कोई कमी नही आती और दाहिनी तरफ़ को जरूरी ख़्याल करना गलतफहमी है।
📚 *गलत फ़हमियाँ और उनकी इस्लाह सफहा, 31*
📍 *नोट :- आप हजरात के पास अभी तक जितनी भी पोस्ट पेश कि गई है। सब पोस्टो मे तकरीबन नमाज* से जुड़ी हुई है। आप तमामी हजरात से मेरी मोअदबाना गुजारिस है। नमाज किसी भी हाल मे माफ नही है। नमाज पढ़ो नमाज पढ़ो इससे पहले हमारी नमाज़ पढ़ी जाए अल्लाह हम सबको कहने सुनने से ज्यादा अमल की तौफीक अता फरमाए
*आमीन सुम्मा आमीन या रब्बुल आलमीन*
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