*【POST 33】जुमे के खुतबे मे उर्दू अशआर पढ़ना*

*जुमे का खुतबा सिर्फ अरबी ज़बान मे पढ़ना सुन्नत है। किसी और ज़बान मे खिलाफे सुन्नत। उर्दू अशआर अगर पढ़ना हो तो वह अजाने खुतबा से पहले पढ़ लिये जायें। दूसरी अज़ान के बाद जो खुतबा पढ़ा जाता है। यह अरबी के अलावा और किसी जबान मे पढ़ना सुन्नत के खिलाफ है।*

 📗 *(फ़तावा रजविया जिल्द 3 सफहा 751)*
📚 *गलत फ़हमियाँ और उनकी इस्लाह सफहा, 37*

_आप सभी हजरात बखूबी जानते है। खुतवा को सुनना बाजिब है। जो खुतवे के दौरान बातो मे मसगूल रहता है। अल्लाह तआला की बारगाह मे ऐसे शख्स की शख्त पकड़ होगी बाज़ धो तो यहा तक देखे जाते है। अगर खुत्बे की अज़ान हो जाती है। और इमाम खुतबा पढ़ना सुरू कर देता है। इसके बाद भी लोग सुन्नतो को पढ़ने मे मसगूल रहते है। जो मना फरमाया है। खुतबे का अदब करना खुतबे को ब गौर सुनना दो जानू बैठना यह खुतबा सुनने के आदाब है। जिससे हम जेसे कम इल्म बाले लोग महरूम रह जाते है। और गुनाह मे मुबतला हो जाते है।_

*अल्लाह तआला से दुआ है। हमे सही मायनो भे शरीअत का पाबंद बनाए आमीन सुम्मा आमीन या रब्बुल आलमीन*

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